india bloc ec voter list controversy bihar 2025: बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन पर INDIA गुट का चुनाव आयोग से सीधा सवाल!
india bloc ec voter list controversy bihar 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को लेकर गहरी राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। विपक्षी INDIA गठबंधन ने इस प्रक्रिया को ‘वोटबंदी’ करार देते हुए चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को कांग्रेस, राजद, वाम दलों और समाजवादी पार्टी समेत 11 विपक्षी पार्टियों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला और अपनी आशंकाएं जाहिर कीं।
“ECI सवालों का जवाब नहीं दे सका” – दीपांकर भट्टाचार्य
CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बैठक के बाद कहा,
“हमने जो सवाल उठाए, उन पर आयोग ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उल्टा हमारी चिंताएं और गहरी हो गई हैं।”
जयराम रमेश का निशाना- ये वोटबंदी लोकतंत्र के लिए घातक
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“प्रधानमंत्री की नोटबंदी ने जैसे देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया, ठीक वैसे ही ये ‘वोटबंदी’ लोकतंत्र की नींव हिला सकती है।”
उन्होंने कहा कि ECI ने विपक्ष को मिलने की अनुमति पहले नहीं दी थी। बाद में मजबूरी में बैठक हुई, लेकिन हर पार्टी से केवल दो लोगों को ही अंदर जाने दिया गया। जयराम रमेश, पवन खेड़ा और अन्य नेता दो घंटे तक वेटिंग रूम में इंतजार करते रहे।
कौन-कौन था प्रतिनिधिमंडल में?
- कांग्रेस: अभिषेक मनु सिंघवी
- CPI: डी. राजा
- RJD: मनोज झा
- CPI(ML): दीपांकर भट्टाचार्य
- SP, NCP (शरद पवार गुट), CPI(M) के नेता
कुल 11 पार्टियों का एकजुट प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के निर्वाचन सदन (दिल्ली) पहुंचा।
क्या है यह SIR प्रक्रिया, जिस पर विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision — यह एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का वैरिफिकेशन करते हैं। केवल वे लोग जिनका फॉर्म भरकर सत्यापन हो जाता है, उन्हें ही वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा।
- अगर 25 जुलाई 2025 तक वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो नाम लिस्ट से हट सकते हैं।
- INDIA गुट का आरोप है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर जटिल बनाई गई है ताकि विशेष समुदायों के नाम हटाए जा सकें।
ECI का बचाव- SIR प्रक्रिया संवैधानिक है
चुनाव आयोग ने बैठक के बाद कहा:
“SIR पूरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत संचालित हो रही है। हर पार्टी को अपनी बात रखने का मौका मिला।”
ECI ने यह भी कहा कि दो प्रतिनिधियों की सीमा प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए थी।
INDIA गठबंधन की ओर से उठाया गया ‘वोटबंदी’ शब्द अब एक नए राजनीतिक विमर्श की शुरुआत कर रहा है। सवाल है कि क्या यह सिर्फ चुनावी रणनीति है या वाकई लोकतंत्र के लिए कोई बड़ा खतरा मंडरा रहा है? आने वाले हफ्तों में बिहार की SIR प्रक्रिया और ECI की पारदर्शिता इस बहस को और गहरा कर सकती है।
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