Himachal Cloudburst Landslide Mandi : हिमाचल की रात टूटी नींद, सड़कें बह गईं,
Himachal Cloudburst Landslide Mandi: हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियां, जो आमतौर पर अपनी शांति और सुंदरता के लिए जानी जाती हैं, अब प्रकृति के गुस्से से हिली हुई हैं। बिलासपुर में बादल फटा, मंडी में भूस्खलन हुआ।

किसी के घर की छत बह गई, तो किसी की जिंदगी भर की कमाई मलबे में दब गई। हमेशा की तरह, सुबह के सूरज ने फिर से निकलने की कोशिश की पर इस बार उसके साथ एक लंबी सांस और आंसुओं से भरी कहानियाँ थीं।
बिलासपुर के नम्होल में बादल फटा रात के सन्नाटे में गूंजती चीखें
शुक्रवार देर रात जब लोग गहरी नींद में थे, बिलासपुर के नम्होल गांव में आसमान फटा बादल फटा, पानी और मलबा पहाड़ों से सड़क की तरफ दौड़ा।
10 से ज्यादा गाड़ियां मलबे में दबीं। सड़कें बह गईं। कई घरों में दरारें आ गईं, और कुछ पूरी तरह ढह गए। सोचिए एक परिवार जो 15 साल से जिस घर में रह रहा था, आज उसके पास सिर्फ एक बैग बचा है।
मंडी के धर्मपुर में लैंडस्लाइड लोगों ने रात में छोड़े घर
शनिवार सुबह करीब 4 बजे, मंडी जिले के धर्मपुर इलाके में सपड़ी रोह गांव में भूस्खलन हुआ। मलबा धीरे-धीरे गांव के घरों की तरफ बढ़ा। 8 घरों को रातों-रात खाली कराना पड़ा। लोग जो कुछ भी हाथ में आया, लेकर भागे। एक बुजुर्ग महिला ने बताया मेरे पति की तस्वीर ही उठा पाई। बाक़ी सब मिट्टी में चला गया। ये सिर्फ ज़मीन नहीं खिसकी लोगों की ज़िंदगी की नींव हिल गई।

बारिश के आंकड़े डराने लगे हैं
- हिमाचल में 1 से 12 सितंबर के बीच 150.4mm बारिश हुई है जो सामान्य (64.6mm) से 133% ज्यादा है।
- पूरे सीजन में अब तक 43% अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है।
- कुल्लू, सोलन, ऊना और शिमला जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
राज्य में अब तक 386 लोगों की मौत हो चुकी है।
उत्तरी भारत में भी खतरा यूपी, बिहार, एमपी में हालात बिगड़ते जा रहे
- उन्नाव में गंगा का जलस्तर खतरे से 23cm ऊपर है। 80 गांव डूबे हुए हैं। लोग तंबूओं में रह रहे हैं, नावों से आवाजाही कर रहे हैं।
- फर्रुखाबाद में ग्रामीण अपने घर खुद तोड़ रहे हैं, ताकि ईंटें और सरिया बचाया जा सके।
- बिहार के 27 जिलों में यलो अलर्ट, हरियाणा और पंजाब में भी भारी बारिश की संभावना।
- राजस्थान में मानसून के बाद ठंडी रातें शुरू हो गईं, पर कई इलाकों में बांध टूटने से बहाव जारी है।
15 सितंबर से मानसून की वापसी संभव पर क्या राहत मिलेगी?
मौसम विभाग का कहना है कि 15 सितंबर से मानसून पश्चिमी राजस्थान से लौटना शुरू करेगा। लेकिन सवाल ये है क्या तब तक तबाही रुक पाएगी? या फिर हर साल की तरह इस बार भी हम सिर्फ “रिपोर्ट” बनाकर रह जाएंगे?

हर साल मानसून आता है। हर बार बाढ़, लैंडस्लाइड और बादल फटने की खबरें आती हैं। हम आंसू बहाते हैं, सरकारें मुआवज़ा देती हैं, और ज़िंदगी जैसे-तैसे फिर शुरू होती है।
लेकिन इस बार बात सिर्फ बारिश की नहीं है, ये बात है लापरवाही, पुरानी नालियों, कमजोर सड़कों और पहाड़ों की बेहिसाब खुदाई की। बिलासपुर, मंडी, उन्नाव, फर्रुखाबाद ये सिर्फ नाम नहीं हैं। ये उन लोगों की पहचान हैं, जो अब हर बारिश के साथ डर के साए में जी रहे हैं।

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