Himachal budget: हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा संकेत देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि सरकार अब सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि 8000 करोड़ रुपये के सालाना नुकसान के दबाव में सरकार खर्चों में कटौती और नए राजस्व स्रोत तलाशने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
RDG बंद होने से बढ़ी चुनौती
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के कारण प्रदेश को हर साल करीब 8000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, तथा इस भारी वित्तीय दबाव ने सरकार को खर्चों पर नियंत्रण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए मजबूर कर दिया है।

कैबिनेट दर्जा वापस लेना बड़ा फैसला
सरकार ने हाल ही में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और एडवाइज़र को दिया गया कैबिनेट दर्जा वापस लेने का निर्णय लिया है। इसे खर्चों में कटौती की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले समय में ऐसे और भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
आगामी बजट पर भी दिखेगा असर
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आगे कहा कि इन निर्णयों का असर आगामी बजट में साफ तौर पर नजर आएगा। अपने बयानों को जारी रखते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार फिलहाल बजट तैयार करने में जुटी है और वित्तीय हालात को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाने की कोशिश कर रही है।
हालाँकि CM सुक्खू ने स्पष्ट किया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों के बजट में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। उनके अनुसार, सरकार की प्राथमिकता आम जनता को राहत देना और जरूरी सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना है।
संपन्न वर्ग पर बढाया जा सकता है टैक्स
वहीं दूसरी ओर सूत्रों की मानें तो राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार सक्षम और संपन्न वर्ग पर नए टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने संकेत दिए कि यह कदम वित्तीय संतुलन बनाए रखने और राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए उठाया जा सकता है।
विपक्ष पर सुक्खू ने बोला हमला
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस दौरान विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका काम केवल आलोचना करना रह गया है, जबकि सरकार राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठा रही है।
