haridwar mansa devi temple stampede : अफवाह और भीड़ प्रबंधन की बड़ी विफलता
haridwar mansa devi temple stampede: उत्तराखंड के हरिद्वार में 27 जुलाई 2025 की सुबह लगभग 9:15 बजे मनसा देवी मंदिर के पर्वत मार्ग पर एक भयावह भगदड़ की घटना हुई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर मार्ग पर सीढ़ियों पर करंट (बिजली का झटका) लगने की अफवाह फैलते ही हजारों श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। परिणामस्वरूप इस हादसे में छह लोगों की जान चली गई और करीब 29 श्रद्धालु घायल हुए।
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने बताया कि भारी भीड़ के चलते अचानक सीढ़ियों पर मार्ग अवरुद्ध हुआ और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने कहा:
“मंदिर में भारी भीड़ जुटने के कारण यह दर्दनाक घटना हुई”
पुलिस अधिकारियों ने शुरुआती सूचना दी कि लगभग 35 घायल मंदिर मार्ग से अस्पताल ले जाए गए थे, जिनमें से छह की मौत हुई और बाकी का इलाज जारी है। SSP प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी 35 घायलों की प्राप्त हुई थी, बाद में संख्या 29 बताई गई है
क्या थी वजह: अफवाह या वास्तविक करंट?
कुछ चश्मीदों का कहना है कि मंदिर मार्ग पर लगभग 100 मीटर नीचे सीढ़ियों के पास बिजली का झटका लगने की अफवाह छिड़ गई। इस अफवाह ने अफरा-तफरी फैला दी, जिससे लोग भागने लगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, हालांकि, बिजली विभाग या प्रशासन ने करंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है; इस मामले की जांच अभी जारी है
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और बचाव कार्रवाई
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और अफसरों को तुरंत राहत और बचाव कार्य सख्ती से करने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि SDRF, स्थानीय पुलिस तथा अन्य बचाव दल घटनास्थल पर सक्रिय हैं और मैं खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हूँ
आपदा प्रबंधन और चिकित्सा टीमें तुरंत वहां पहुंचीं, घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गढ़वाल आयुक्त भी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं ताकि विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा सके
भीड़ प्रबंधन और संरचना कमियों पर सवाल
मनसा देवी मंदिर हर-की-पौड़ी से लगभग 1.5 किमी दूर शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित है। इसमें दो मार्ग हैं: पैदल चढ़ाई और रोपवे। बावजूद इसके, स narrow pathway होने के कारण बड़ी संख्या में भक्तों के आने पर मार्ग जल्दी अवरुद्ध हो जाता है। भले ही रोपवे व्यवस्थित है, पैदल मार्ग पर ठहराव और भीड़ संचालन की गंभीर समस्याएं उजागर हुईं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत ने यह कहते हुए घटना की जांच की मांग की कि केवल रोपवे और पैदल मार्ग पर्याप्त नहीं है, संगठित भीड़‑प्रबंधन और सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं
पिछली प्रमुख धार्मिक स्थल दुर्घटनाओं का संदर्भ
भारत में मंदिरों और तीर्थस्थलों पर अब तक कई बार भगदड़ जैसी tragedies सामने आई हैं जैसे 2008 में चामुण्डा देवी मंदिर, जोधपुर में 224 लोगों की मौत हुई थी, और नैंना देवी मंदिर (हिमाचल) में 146 लोग मरे थे। इन घटनाओं में सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी, भीड़ नियंत्रण की दुर्बलता प्रमुख कारण रहे हैं
क्या यह केवल अफवाह का परिणाम था?
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या धार्मिक स्थलों पर केवल आधारभूत संरचना पर्याप्त है या भीड़ प्रबंधन, आपात स्थिति प्रशिक्षण, अफवाह नियंत्रण और वास्तविक समय निगरानी जैसी जटिल तैयारियाँ भी आवश्यक हैं।
- मौलिक कारण: अफवाह से शुरू हुई अफरा-तफरी या भीड़भाड़?
- जांच: किसने करंट अफवाह फैलाई—is इसकी नियमति जांच हो रही है।
- सुरक्षा कसर: मंदिर मार्ग पर संरचना और crowd flow व्यवस्था कितनी सक्षम थी?
- भविष्य के निर्देश: प्रशासन को इस पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे, विशेषकर श्रावण या पर्व के दिनों में।
