Gwalior road collapse: ग्वालियर की चेतकपुरी रोड (महल रोड) के बार-बार धंसने के मामले में नगर निगम के दो प्रभारी कार्यपालन यंत्री पवन सिंघल और सुरेश अहिरवार को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों पर सड़क निर्माण के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप है। यह कार्रवाई नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय द्वारा नगरीय प्रशासन विभाग को भेजे गए पत्र के आधार पर की गई है।

Gwalior road collapse: पूरे प्रदेश में ग्वालियर की बदनामी हुई
गौरतलब है कि मानसून सत्र से पहले नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनी चेतकपुरी रोड बारिश के शुरुआती दिनों में ही लगातार धंसती रही। महल रोड, जो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल तक जाती है और वीआईपी मार्ग मानी जाती है, महज 10 दिनों में 8 बार धंस गई। एक घटना में सड़क के नीचे सुरंग जैसी गहराई तक बन गई थी, जिससे पूरे प्रदेश में ग्वालियर की बदनामी हुई।
Gwalior road collapse: जिससे रोड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई
नगर निगम आयुक्त ने बताया कि स्ट्रॉम वॉटर लाइन के निर्माण के चलते रोड की खुदाई की गई थी। इसके बाद चेतकपुरी चौराहे से ऑडिट भवन तक डामर रोड का निर्माण अनुबंधित ठेकेदार से कराया गया। लेकिन बारिश शुरू होते ही नई सड़क जगह-जगह से धंस गई, जिससे रोड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
निलंबन के लिए अलग-अलग आदेश जारी किए गए
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने इस लापरवाही के लिए प्रभारी कार्यपालन यंत्रियों पवन सिंघल और सुरेश अहिरवार को जिम्मेदार मानते हुए पहले भी निलंबन की सिफारिश की थी। हालांकि उस समय एमआईसी (कार्यकारिणी समिति) ने प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी और दोनों अधिकारी कार्रवाई से बच गए थे। लेकिन बाद में आयुक्त ने सीधे शासन को प्रस्ताव भेजा, जिस पर कार्रवाई करते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनके निलंबन के लिए अलग-अलग आदेश जारी किए गए हैं।
लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी
यह मामला शहर में प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शासन की यह कार्रवाई एक चेतावनी मानी जा रही है कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
