ऑनलाइन गेम… सुनने में मज़ेदार लगता है, लेकिन अब यह गेम मौत का खेल बन चुका है। मध्य प्रदेश में सिर्फ 15 दिनों में तीन लोगों ने इस जानलेवा गेमिंग की वजह से अपनी जान दे दी। किसी ने मोबाइल से हजारों रुपये हारे, किसी ने लाखों का कर्ज लिया… और फिर खेलते-खेलते ज़िंदगी ही हार बैठे। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इन शिकारों में सिर्फ बच्चे और स्टूडेंट ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
पहला केस – इंदौर
इंदौर के ऑटोमोबाइल कारोबारी अंकेश जैन के 13 वर्षीय बेटे अक्लंक जैन ने 30 जुलाई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।परिवार ने अभी एक दिन पहले ही उसका जन्मदिन मनाया था। अक्लंक को फुटबॉल का बहुत शौक था लेकिन हाल ही में वह ऑनलाइन गेमिंग में उलझ गया। उसने अपनी मां के अकाउंट को गेम से लिंक कर लिया था।31 जुलाई को जब अकाउंट से ₹2800 कटे तो वह घबरा गया। बुआ ने समझाया कि यह रकम बड़ी नहीं है, लेकिन कुछ ही देर बाद उसने अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली।
दूसरा केस – ग्वालियर (डबरा)
डबरा के किसान परिवार का इकलौता बेटा विकेश रावत (18 साल) हाल ही में 12वीं पास हुआ था। कियोस्क सेंटर पर बैठते-बैठते उसे ऑनलाइन बेटिंग गेम की लत लग गई।कुछ ही दिनों में वह ₹35,000 हार गया। उसने गांव में ₹30,000 और उधार भी लिए। 11 अगस्त को बाइक लेकर घर से निकला और माल गोदाम के पास फांसी लगाकर जान दे दी।
तीसरा केस – हरदा
भोपाल निवासी और खेल एवं युवक कल्याण विभाग में चपरासी लक्ष्मीनारायण केवट हरदा में पत्नी-बेटी के साथ रहते थे। 9 अगस्त को उन्होंने घर में अकेले गैस सिलेंडर की नली से दम घोंटकर आत्महत्या कर ली।परिवार का कहना है कि वह लाखों रुपये के कर्ज में डूबे थे और मोबाइल पर घंटों गेमिंग में व्यस्त रहते थे।
ये भी जिन्होंने गेम में गवाई जान
अप्रैल 2024 में इंदौर का पुलिस आरक्षक नितेश वर्मा भी ऑनलाइन गेम के कर्ज से परेशान होकर सुसाइड कर चुका है।उज्जैन के लॉ स्टूडेंट हर्ष ने भी गेमिंग में हारकर खुदकुशी की कोशिश की थी, लेकिन मथुरा-वृंदावन जाकर संभल गया और परिवार के पास लौट आया।
समझिए कैसे गेमिंग में पैसे गंवाते हैं लोग
गेमिंग कंपनियां प्रीमियम फीचर और करोड़ों जीतने का लालच देकर बच्चों को फंसाती हैं।
शुरुआत में थोड़ी जीत दिलाकर फिर लगातार पैसा हरवाया जाता है।
कई बेटिंग एप्स सीधे जुआ-सट्टा कराते हैं, जिनके लिंक सोशल मीडिया से मिलते हैं।
लालच में लोग कर्ज तक ले लेते हैं और डिप्रेशन का शिकार होकर खुदकुशी कर बैठते हैं।
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