गरीब छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ किया जा रहा खुलेआम खिलवाड़
मध्य प्रदेश के देवरी में, जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रयासरत है, वहीं कुछ प्राइवेट नर्सिंग संस्थानों द्वारा शासन के नियमों और आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। इस संदर्भ में देवरी के शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के क्षेत्रों में नर्सिंग कोर्स के नाम पर छात्र-छात्राओं से भारी वसूली की जा रही है। ये संस्थाएं न केवल छात्र-छात्राओं से भारी फीस वसूल रही हैं, बल्कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं के बिना प्रशिक्षण भी दे रही हैं।

नर्सिंग कोर्स के नाम पर वसूली
देवरी में एक नामी संस्था, “शाओलिन नर्सिंग सेवा संस्थान,” ने अपने संस्थान के नाम पर छात्रों से 19,500 रुपये प्रति छात्र वसूल किए हैं। यह संस्था नर्सिंग असिस्टेंट, ओ.टी. टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन जैसी ट्रेनिंग देने का दावा करती है, लेकिन यहां की वास्तविक स्थिति बहुत अलग है। इस संस्थान में न तो आवश्यक सुविधाएं हैं, न ही कोई लैब है, और न ही छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की उचित व्यवस्था। सिर्फ कागजी तौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि छात्रों से भारी फीस ली जा रही है।
संचालक अमनसिंह लोधी द्वारा यह संस्था ग्राम हीरापुर में चलायी जा रही है, जो कि तहसील स्तर पर एक छोटे से निजी मकान में स्थित है। यहां न तो आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर है, न ही शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोई अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। जब इस बारे में जांच की गई तो यह बात सामने आई कि छात्र-छात्राओं को नर्सिंग कोर्स के बजाय केवल कागजी डिप्लोमा दिया जा रहा है, और कोई भी प्रैक्टिकल प्रशिक्षण नहीं कराया जा रहा है।
इस संदर्भ में जब संस्थान के संचालक से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि यहां कोई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं दी जाती है और केवल सामान्य शिक्षा दी जा रही है। बावजूद इसके, उन्होंने 19,500 रुपये फीस के रूप में वसूले हैं और छात्रों को यह भरोसा दिया है कि उन्हें 100% नौकरी दी जाएगी। लेकिन छात्र अब यह समझ नहीं पा रहे हैं कि यह कोर्स कानूनी है या अवैध।
छात्रों की परेशानियां
कई छात्रों ने इस बारे में अपनी परेशानी व्यक्त की। मनीषा गौड़, एक छात्रा, ने बताया कि उसने नर्सिंग कोर्स के लिए 19,500 रुपये फीस दी है, लेकिन उसे अभी तक कोई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं मिली है। वहीं, रामलाल पटेल ने कहा कि वह पिछले 6 महीने से यह कोर्स कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल कक्षाएं दी जाती हैं, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं। संदीप कुर्मी ने बताया कि उन्हें देवरी अस्पताल में 3 महीने में सिर्फ एक बार ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद उनसे 19,500 रुपये लिए गए हैं।

स्थानीय अधिकारियों की चुप्पी
यह मामला केवल देवरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। देवरी के एसडीएम, नगरपालिका अधिकारी, और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यह संस्था बिना किसी सरकारी अनुमोदन के काम कर रही है, और छात्रों से अवैध वसूली की जा रही है। इसके बावजूद, संबंधित अधिकारी मामले की जांच करने में अनिच्छुक दिख रहे हैं।
मध्य प्रदेश सरकार की चिंता
यह घटना सरकार की चिंता को और बढ़ाती है, क्योंकि प्रदेश भर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना और प्राइवेट कॉलेजों को मान्यता देकर नर्सिंग कोर्स की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कुछ ऐसे निजी संस्थान हैं जो नियमों का उल्लंघन कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यह केवल शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं, बल्कि गरीब छात्रों का शोषण भी है।
स्थान: देवरी, सागर (मध्य प्रदेश)
रिपोर्टर: देवभूषण दुबे
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