Fragile X Syndrome: आज के दौर में जब स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से प्रगति हो रही है, तब भी कई आनुवंशिक बीमारियां ऐसी हैं जिनके बारे में जागरूकता की भारी कमी है। ऐसी ही एक बीमारी है — फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम (Fragile X Syndrome)। यह एक आनुवंशिक विकार है, जो बौद्धिक विकलांगता, विकासात्मक देरी, और व्यवहारिक समस्याओं का कारण बनता है।
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यह सिंड्रोम एक्स गुणसूत्र पर स्थित FMR1 जीन में गड़बड़ी के कारण होता है। यह विकार महिलाओं और पुरुषों दोनों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन पुरुषों में इसके लक्षण अधिक स्पष्ट होते हैं।
क्या है फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम?
फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम एक इनहेरिटेड जेनेटिक डिसऑर्डर है, जो तब होता है जब FMR1 जीन में उत्परिवर्तन (mutation) के कारण इसका आवश्यक प्रोटीन नहीं बन पाता। यह प्रोटीन मस्तिष्क के विकास और तंत्रिका तंत्र के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य लक्षण: शारीरिक, बौद्धिक और व्यवहारिक प्रभाव
शारीरिक लक्षण…
1. लंबा चेहरा और उभरे हुए कान
2. पुरुषों में बड़े अंडकोष
3. जोड़ों की अत्यधिक लचीलापन
4. माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स जैसी हृदय समस्याएं
बौद्धिक लक्षण..
1. सीखने में कठिनाई
2. बौद्धिक मंदता (Intellectual Disability)
3. भाषण और भाषा में देरी
व्यवहारिक लक्षण…
1. ऑटिज्म जैसे व्यवहार, जैसे बार-बार दोहराव वाली गतिविधियाँ
2. सामाजिक डर और आंखों से संपर्क से बचाव
3. चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी
उपचार और प्रबंधन निदान नहीं, लेकिन बेहतर जीवन संभव…
फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम का अभी तक कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन प्रारंभिक हस्तक्षेप (early intervention) और समुचित प्रबंधन रणनीतियों से लक्षणों को नियंत्रण में रखा जा सकता है और व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने में सहायता मिल सकती है।
सूत्रो के अनुसार, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश बताते हैं कि –
उपचार का मुख्य उद्देश्य बच्चे के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को बेहतर बनाना होता है।
उनके अनुसार, इस विकार से पीड़ित बच्चों की मदद के लिए स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, बिहेवियरल थेरेपी, और विशेष शिक्षा जैसी सेवाएं बेहद कारगर होती हैं।
कुछ मामलों में, यदि बच्चा अत्यधिक बेचैनी, हाइपरएक्टिविटी या नींद की समस्याओं से जूझ रहा हो, तो चिकित्सक दवाओं का सहारा भी ले सकते हैं।
डॉ. राकेश यह भी जोर देते हैं कि यदि इस स्थिति की समय पर पहचान हो जाए और सही ट्रीटमेंट एवं सपोर्ट सिस्टम मिल जाए, तो बच्चा एक संतुलित और आत्मनिर्भर जीवन जी सकता है।

उपलब्ध उपचार विकल्प…
1. विशेष शिक्षा और भाषण चिकित्सा: सीखने और संवाद में सहायता।
2. व्यवहार चिकित्सा: ऑटिज्म जैसे व्यवहारों को नियंत्रित करने में सहायक।
3. दवाएं: अति सक्रियता, दौरे या चिंता जैसी समस्याओं के लिए।
4. शारीरिक चिकित्सा: जोड़ों की लचीलापन और मांसपेशियों की मजबूती।
5. सामाजिक कौशल प्रशिक्षण: दूसरों के साथ बातचीत और व्यवहार सुधारने में मदद।..
6. पारिवारिक परामर्श: माता-पिता और परिवार को जागरूक और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए।
भारत में जागरूकता की आवश्यकता…
भारत में अभी भी फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम के बारे में जागरूकता बेहद सीमित है। प्रसव पूर्व परीक्षण (prenatal testing) और जेनेटिक काउंसलिंग से इस स्थिति की पहचान जल्दी की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समाज को इस विकार के बारे में अधिक जानकारी देना आवश्यक है ताकि बच्चों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके।
Note – उपरोक्त जानकारी विभिन्न स्त्रोतो से ली गई है, कृपया इसे अपनाने से पहले लें किसी एक्सपर्ट की सलाह।
