इटावा कांड में ब्राह्मणों ने कथावाचकों का सिर मुंडवाया
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में ब्राह्मण समुदाय द्वारा यादव कथावाचकों—मुकुट मणि यादव और संत सिंह यादव—के खिलाफ की गई अनुसंधान से ताजा परिस्थिति पालटती दिख रही है। कथावाचकों को आरोप हैकि उन्होंने जाति छिपाकर धार्मिक आयोजन किया और दो फर्जी आधार कार्ड बनाए—जिसके चलते सोमवार को एसीजेएम कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया
शुरूआत जाति पर भड़काऊ विवाद
22 जून को इटावा की दादरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान, कथावाचक मुकुट मणि यादव और संत सिंह यादव की जाति पर सवाल उठाए गए। जब उन्होंने यादव होने की बात स्वीकार की, तो ब्राह्मण समुदाय के लोग उन्हें पीटकर सिर मुंडवाकर, नाक रगड़वाकर discoloration the humiliation किया घटना का वीडियो वायरल होने पर राज्यभर में विवाद भड़क गया और NHRC तक को यह मामला उठाया गया एसपी इटावा और झांसी पुलिस ने घटना स्थल का वीडियो जांचा।
आरोप: फर्जी आधार और जाति छिपाना
कथावाचकों पर आरोप है कि उन्होंने दो आधार कार्ड रखे एक ‘मुकुट मणि यादव’, दूसरा ‘मुकुट सिंह अग्निहोत्री’—इसके जरिए कथावाचना में भाग लिया कथावाचक और सहयोगी संत सिंह यादव पर यह भी आरोप है कि जाति छिपाकर धार्मिक आयोजन किया गया, जो कि धोखाधड़ी के तहत आता है। 24 जून को यजमान रेनू तिवारी ने कथावाचकों के खिलाफ FIR दर्ज की जिसमें यह आरोप शामिल था
जमानत याचिका खारिज, गिरफ्तारी वारंट जारी
कथावाचकों ने इस वर्ष 16 जुलाई को अग्रिम जमानत याचिका दायर की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया इसके बाद पूंछ थाना प्रभारी जेपी पाल ने गिरफ्तारी वारंट की मांग की और फ्राइडे को वारंट जारी कर दिया गया है
सियासत में आग: अखिलेश यादव ने टिप्पणी की
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को जातीय साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि इसे यूपी में साम्प्रदायिक फूट डालने की योजना का हिस्सा बताया उन्होंने आरोप लगाया कि कथावाचकों पर हमला पिछड़ी, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग को निशाना बनाने के लिए किया गया था इसके पहले उन्होंने कथावाचकों को बुलाकर लखनऊ में सम्मानित भी किया था—यह कदम उनका सियासी और सामाजिक संदेश था
कथावाचकों की शैक्षिक पृष्ठभूमि
मुकुट मणि यादव बताते हैं कि उन्होंने बीए तक पढ़ाई की और 15 साल से कथा वाचन कर रहे हैं। संत सिंह यादव BSc कंप्लीट कर चुके हैं, पूर्व में शिक्षक रह चुके हैं दोनों ने कहा कि ‘आचार्य’ की उपाधि पारंपरिक गुरु–शिष्य पद्धति से प्राप्त की है और उनका काव्य वाचन लंबे समय से चला आ रहा है
आगे क्या होगा?
गिरफ्तारी वारंट के बाद पुलिस कथावाचकों को तलाश कर पेश करने के लिए कार्रवाई करेगी। अदालत आगे जांच जारी रखने और दोनों कथावाचकों की भूमिका तय करने के लिए आदेश देगी। इस पूरे मामले से जातिगत तनाव बन सकता है—यदि पुलिस और प्रशासन समय रहते संतुलित कदम नहीं उठाते हैं।
