भस्म आरती में बाबा को लगा उबटन, फुलझड़ी जलाकर दिवली की शुरुआत

Diwali at Mahakal Temple: सनातन हिंदू परंपरा का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली देश में सबसे पहले महाकाल मंदिर में मनाया गया। सुबह तड़के भस्म आरती में में पहले बाबा महाकाल को उबटन लगाकर सजाया, फिर फुलझड़ी जलाकर और अन्नकूट का भोग लगाकर दीपावली पर्व की शुरुआत की गई
Diwali at Mahakal Temple: बाबा के ऑगन से दिवाली की शुरुआत

उज्जैन की परंपरानुसार हर पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल की तड़के होने वाली भस्म आरती से होती है. वहीं इस बार तिथियों के चलते दीपावली भी कहीं 31 अक्टूबर तो कहीं 1 नवम्बर को मानी जा रही है, लेकिन महाकाल मंदिर में ग्वालियर पंचांग से पर्व तय होते हैं. इसलिए गुरुवार को ही रूप चौदस और दीपावली मानी गई. इसलिए तड़के हुई भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, घी, शहद और फल के रस से बने पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया. इस दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा को केसर चंदन इत्र का उघटन लगाया. उसके बाद गर्भ गृह में बाबा महाकाल के साथ पुजारी ने फुलझड़ियां जलाकर दीपावली पर्व मनाया और अन्न कूट भी लगाया.
Diwali at Mahakal Temple: रोशनी से जगमगाया महाकाल का मंदिर
दीपावली पर महाकाल मंदिर में आकर्षक रंग बिरंगी विद्युत रोशनी की गई है. रंगोली और फूलों से सजाया गया है. वहीं थाईलैंड, बैंकॉक, मलेशिया के अलावा भारत के बैंगलोर, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई से एंथोरियम, लिलियम, कॉर्निशन, सेवंती, डेजी जैसे फूलों से बाबा के आंगन को सजाया गया है.
Diwali at Mahakal Temple: फुलझड़ी जलाकर मनाई दिवाली
पुजारी ने बताया, रूप चौदस होने के चलते भगवान को पुजारी परिवार की महिलाओं ने सुगंधित द्रव्य से बना उबटन लगाया। भगवान के श्रृंगार के बाद भोग के रूप में अन्नकूट अर्पित किया। इसमें धान, खाजा, शक्कर पारे, गूंजे, पपड़ी, मिठाई समेत भोग की थाली में मूली, बैंगन की सब्जी अर्पित की गई। इसके बाद दिव्य भस्म आरती की गई। साथ ही फुलझड़ी जलाकर दिवाली का पर्व मनाया गया।
