Dieting Myths: ज्यादातर लोग मानते हैं कि डाइटिंग में हमारा ज्यादा से ज्यादा भूखा रहना जरूरी है. अगर इसे आदत बना लिया जाए तो शरीर में कई समस्याएं होने लगती हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि डाइटिंग एक हेल्दी तरीका है वेट मैनेजमेंट और बॉडी को सही रखने का. पर इसके कारण बॉडी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, ये बात बहुत कम लोग समझते हैं. पोषक तत्व हमें ताकत देने समेत कई फायदे पहुंचाते हैं और कुछ लोग स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो करने के चक्कर में इनकी कमी का सामना करने लगते हैं. डाइटिंग का मतलब है कि बॉडी की एनर्जी से जुड़ी जरूरतों के अनुसार खानपान करना है, न कि भूखा रहना है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि कई बार बिना साइंटिफिक सबूत के लोग उन पर आसान से भरोसा कर लेते हैं. डाइटिंग का मेन फोकस संतुलित आहार पर होना चाहिए. आप फिट रहने के लिए डाइटिंग फॉलो करें और ध्यान दें कि कब, क्या और कैसे खाना है. खुद को भूखा रखना डाइटिंग की सबसे बड़ी गलती है.
Dieting Myths: डाइटिंग से जुड़े मिथक एक्सपर्ट से जानें
एक्सपर्ट के अनुसार हेल्दी वेट लॉस भूखा रहना या स्ट्रिक्ट डाइट नहीं है बल्कि बैलेंस न्यूट्रिशन से होता है. डाइटिंग से जुड़े 8 मिथक भी है जिन पर भरोसा करने से बॉडी को नुकसान तक हो सकता है.
डाइटिंग का मतलब भूखा रहना नहीं है
एक्सपर्ट कहती हैं डाइटिंग का सबसे बड़ा मिथ यही है कि हमें कम खाना चाहिए या भूखा रहना जरूरी है. अगर आप बहुत कम खाते हैं तो इससे भी मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और बॉडी फैट को स्टोर करना शुरू कर देती है. इस कारण वेट मैनेजमेंट बिगड़ने लगता है. हेल्दी डाइटिंग का मतलब बैलेंस मील्स से होता है. डाइट में फल-सब्जियां जरूर खाएं क्योंकि ये वजन बढ़ाती नहीं हैं और पोषक तत्व भी मिलते हैं.
कार्ब्स से बढ़ता है वजन
कार्बोहाइड्रेट्स बॉडी का प्राइमरी एनर्जी सोर्स है. गीतिका चोपड़ा कहती हैं कि प्रॉब्लम कार्ब्स नहीं है बल्कि रिफाइंड कार्ब्स से हैं. अगर आप मैदा, शुगर या अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को रेगुलर खाते हैं तो इससे वेट तेजी से बढ़ने लगता है. वेट मैनेजमेंट के लिए फाइबर और कार्ब्स दोनों लेने चाहिए. कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से वजन बढ़ने की शिकायत होने लगती हैं अगर इन्हें भी लिमिट से ज्यादा लिया जाए.
रात में खाना न खाना
लोगों में वजन को कंट्रोल रखने के लिए मिथ फैला हुआ है कि रात में खाना छोड़ना बेस्ट है. ऐसा करने से वजन जल्दी कम होता है. एक्सपर्ट कहती हैं कि डिनर न करने से मेटाबॉलिज्म डिस्टर्ब होता है और अगली मील में ओवरइटिंग का खतरा बढ़ जाता है.
Dieting Myths: सिर्फ फल खाने से वजन कम होना
कुछ लोग वजन घटाने के लिए अनाज पूरी तरह से छोड़ देते हैं. ये भी एक मिथक है क्योंकि फ्रूट डाइट से बॉडी को प्रोटीन मिलता है. हेल्दी फैट्स और न्यूट्रिएंट्स की कमी होती है. इस वजह से शरीर में कमजोरी और मांसपेशियों का लॉस होता है. सब्जियां और साबुत अनाज जैसी चीजों का इंटेक जरूर करें. इस बैलेंस डाइट से बॉडी ग्रो कर पाती है और वेट भी कंट्रोल में रहता है.
डाइट से फैट को हटा देना
लोग ऐसा भी मानते हैं कि फैट को छोड़ दें तो वजन घटाने में आसानी मिलेगी. ये डाइटिंग से जुड़ा एक बड़ा मिथक है. ऑयल या दूसरी अनहेल्दी चीजों से मिलने वाले फैट को नजरअंदाज करना सही है. लेकिन फैट न लेने के नाम पर हेल्दी फैट को इग्नोर करना बीमार कर सकता है. हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, सीड्स और देसी घी हार्मोन, मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी होते हैं.
डिटॉक्स ड्रिंक्स ही सब कुछ
लोग मानते हैं कि जीरा, मेथी दाना या दूसरी चीजों से बनी डिटॉक्स ड्रिंक्स से फैट तेजी से घटता है. एक्सपर्ट कहती हैं कि कोई भी ड्रिंक फैट को सीधे पिघलाती नहीं है. ये ड्रिंक्स हाइड्रेशन और डाइजेशन को सपोर्ट कर सकती हैं लेकिन वेट लॉस सही लाइफस्टाइल से होता है.
सिर्फ एक्सरसाइज भी काफी है
कुछ लोग डाइट से ज्यादा एक्सरसाइज पर भरोसा करते हैं. एक्सरसाइज जरूरी है लेकिन साथ में न्यूट्रिशन का रोल भी 60 से 70 फीसदी होता है. लाइफस्टाइल में डाइट और एक्सरसाइज दोनों जरूरी हैं.
फास्ट वेट लॉस ही सही है
ऐसा भी माना जाता है कि डाइटिंग से फास्ट वेट लॉस बेहतरीन तरीका है. एक्सपर्ट कहती हैं कि बहुत जल्दी वजन कम करना लंबे समय तक फायदेमंद साबित नहीं होता. धीरे-धीरे किया गया वेट लॉस हेल्दी रिजल्ट देता है. एक्सपर्ट कहती हैं कि डाइटिंग का मतलब खुद से साथ सख्ती करना नहीं है. सही न्यूट्रिशन और किसी भी तरीके को लगातार अपनाना जरूरी है. जब बॉडी को सही न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं तभी हेल्दी वेट लॉस संभव हो पाता है.
