Dhurandhar on Netflix: दो महीने बाद भी ‘धुरंधर’ क्यों बनी हुई है चर्चा में
Dhurandhar on Netflix: आदित्य धर की फिल्म धुरंधर को रिलीज हुए दो महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है, लेकिन फिल्म की चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही. पहले थिएटर में, फिर सोशल मीडिया पर, और अब नेटफ्लिक्स पर आने के बाद यह जासूसी थ्रिलर एक बार फिर बहस के केंद्र में है,
रणवीर सिंह स्टारर यह फिल्म जब सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तब एक अलग तरह की राय बनी थी. लेकिन जैसे ही फिल्म ने ओटीटी पर दस्तक दी, दर्शकों का नजरिया कुछ बदला हुआ नजर आने लगा
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Dhurandhar on Netflix: कहानी वही, नजरिया बदला
धुरंधर में रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस की भूमिका में हैं, जो पाकिस्तान में एक बेहद खतरनाक अंडरकवर मिशन पर भेजा जाता है. पहचान बदलकर, नाम बदलकर, वह हमजा अली मजारी बनता है, जिसका असली नाम जसकिरत सिंह रंगी है.
फिल्म की कहानी, एक्शन और राजनीतिक पृष्ठभूमि पहले से ही चर्चा में रही, लेकिन असली बहस शुरू हुई कलाकारों के अभिनय को लेकर,
थिएटर रिलीज में किसका दबदबा रहा?
जब धुरंधर 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई, तब सोशल मीडिया पर आम राय यही बनती दिखी कि फिल्म के असली हीरो अक्षय खन्ना हैं. रहमान दकैत के किरदार में अक्षय खन्ना इतने प्रभावशाली लगे कि कई लोगों ने उन्हें फिल्म का एमवीपी तक कह दिया,
उस वक्त कई दर्शकों का मानना था कि अक्षय खन्ना की मौजूदगी ने रणवीर सिंह के किरदार को थोड़ा पीछे धकेल दिया. यहां तक कि कुछ समीक्षाओं में कहा गया कि फिल्म का भार रणवीर नहीं, बल्कि अक्षय अपने कंधों पर उठाए हुए हैं,
नेटफ्लिक्स पर आते ही पलटी कहानी
लेकिन जैसे ही धुरंधर नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई, माहौल बदलता दिखा. जिन्होंने फिल्म को दोबारा देखा, और जिन्होंने पहली बार ओटीटी पर इसे देखा, दोनों की राय थिएटर ऑडियंस से अलग नजर आई,
नेटफ्लिक्स दर्शकों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि रणवीर सिंह का परफॉर्मेंस ही फिल्म की असली रीढ़ है. उनके अनुसार, रणवीर का संयमित अभिनय, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और एक जासूस के भीतर चल रही उथल-पुथल ज्यादा गहराई से समझ में आती है जब फिल्म घर पर ध्यान से देखी जाती है,
कई दर्शकों ने इस धारणा को भी खारिज किया कि अक्षय खन्ना ने फिल्म में सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था
क्या ओटीटी पर देखने से बदल जाती है फिल्म?
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शक फिल्म को ज्यादा शांत माहौल में, बिना थिएटर के शोर के देखते हैं. ऐसे में किरदारों की बारीकियां, डायलॉग्स और भावनाएं ज्यादा असर छोड़ती हैं,
धुरंधर के मामले में भी शायद यही हुआ. जो फिल्म थिएटर में एक एक्शन थ्रिलर लगी, वही नेटफ्लिक्स पर एक कैरेक्टर-ड्रिवन जासूसी ड्रामा बनकर सामने आई
