dabra navgrah shaktipith: मध्यप्रदेश का डबरा इन दिनों किसी साधारण नगर जैसा नहीं दिख रह. हर गली, हर चौराहा, हर मोड़ पर बस एक ही चर्चा है—एशिया के सर्वश्रेष्ठ नवग्रह शक्तिपीठ की प्राण-प्रतिष्ठा…आज से से शुरू हो रहा यह महाआयोजन धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक लिहाज से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है। नगर पूरी तरह से सज-संवर चुका है, और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी शुरू हो गई है.
dabra navgrah shaktipith: 20 हजार महिलाओं की कलश यात्रा से शुभारंभ
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की शुरुआत मंगलवार सुबह भव्य कलश यात्रा से होगी। स्टेडियम ग्राउंड से सुबह 10 बजे निकलने वाली इस शोभायात्रा में 20 हजार से अधिक महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा नगर पालिका कार्यालय, मैथिलीशरण गुप्त चौराहा, अग्रसेन चौराहा, रेलवे ट्रैक, अंबेडकर चौराहा होते हुए नवग्रह शक्तिपीठ पहुंचेगी। डबरा को धर्मनगरी की तर्ज पर सजाया गया है, हर रास्ता उत्सव का साक्षी बनेगा।

dabra navgrah shaktipith: महामंडलेश्वर दाती महाराज की देखरेख में निर्माण
इस भव्य नवग्रह शक्तिपीठ की स्थापना में शनि धाम पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर दाती महाराज की अहम भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन में पूरे मंदिर परिसर का निर्माण वैदिक वास्तुशास्त्र के अनुरूप किया गया है। दाती महाराज के साथ आचार्य बद्रीश जी महाराज भी डबरा पहुंचे और उन्होंने नवग्रह पीठ का भ्रमण किया।
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सनातन धर्म के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
दाती महाराज का कहना है कि डबरा की पावन भूमि पर बना यह नवग्रह शक्तिपीठ सनातन धर्म के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यहां प्रतिदिन लाखों मंत्रों की आहुतियां दी जाएंगी, विशेष तांत्रिक साधनाएं और अनुष्ठान होंगे। उनका दावा है कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह पीठ पूरी तरह जागृत होगी और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और सुख की अनुभूति होगी।
10 से 20 फरवरी तक दिव्य महोत्सव
प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 10 से 20 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान रात्रि में विशेष यज्ञ होंगे और दिनभर सैकड़ों ब्राह्मणों द्वारा मंत्र जाप किया जाएगा।
- 11 से 13 फरवरी: पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा
- 14 से 16 फरवरी: कवि कुमार विश्वास की प्रस्तुति ‘अपने-अपने राम’
- 17 से 20 फरवरी: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा एवं दिव्य दरबार

विज्ञान और ज्योतिष का अनूठा संगम
करीब 40 हजार वर्गफीट में बने इस मंदिर का ढांचा 108 स्तंभों पर खड़ा है। मंदिर गोलाकार डिजाइन में तैयार किया गया है, ताकि वास्तु के अनुसार कोई अशुभ प्रभाव न पड़े। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुरूप सभी ग्रहों को इस तरह स्थापित किया गया है कि उनकी दृष्टि एक-दूसरे पर न पड़े।मंदिर परिसर में उतने ही क्षेत्रफल का एक विशाल सरोवर भी बनाया गया है, जिससे सूर्य के तेज को संतुलित करने की अवधारणा जुड़ी है।
तीन मंजिलों में नवग्रहों का अद्भुत स्वरूप
- भूतल: आठ ग्रहों की मार्बल प्रतिमाएं और 80 हजार वर्गफीट का सत्संग हॉल
- प्रथम तल: सूर्य देव की विशाल अष्टधातु प्रतिमा उनकी दो पत्नियों के साथ, अन्य ग्रह भी अपनी पत्नियों सहित
- द्वितीय तल: ग्रहों के देव पीठ-शनि के लिए काल भैरव, मंगल के लिए हनुमान, बुध-गुरु के लिए विष्णु स्वरूप, राहु-केतु के लिए विशेष देव प्रतिमाएं
- डबरा बनेगा नया धार्मिक पर्यटन केंद्र
करोड़ों की लागत से भगवान परशुराम लोक न्यास द्वारा निर्मित यह शक्तिपीठ अब ओरछा और दतिया की तरह एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा। देश-विदेश से श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मंदिर परिसर में 70 एसी कमरे, डायनिंग हॉल और पुस्तकालय की भी व्यवस्था की गई है।
