दिल्ली से मुंबई तक, रसोई और गाड़ियों की जेब पर असर पड़ सकता है। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध का झटका अब सीधे भारत की गैस सप्लाई पर दिखने लगा है। ईरानी ड्रोन हमले के बाद कतर ने अपने LNG प्लांट का उत्पादन रोक दिया है। इसका असर यह हुआ कि भारत आने वाली गैस की सप्लाई में करीब 40% तक की कटौती करनी पड़ी है। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो CNG और PNG महंगी हो सकती हैं।
कतर में प्रोडक्शन बंद, सप्लाई चेन टूटी
कतर की सरकारी कंपनी QatarEnergy के मुताबिक, ‘रास लफान’ और ‘मेसाईद’ इंडस्ट्रियल सिटी में मौजूद गैस प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ। सुरक्षा कारणों से LNG उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। कतर की राजधानी Doha के औद्योगिक इलाके से धुआं उठने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। 1 मार्च 2026 को हुए इस हमले के बाद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।
भारत अपनी जरूरत की करीब 40% LNG यानी लगभग 2.7 करोड़ टन सालाना कतर से आयात करता है। विदेश से आने वाली LNG को री-गैसीफाई कर ही CNG और PNG सप्लाई की जाती है। यानी अगर LNG कम आएगी, तो शहरों में गैस की उपलब्धता सीधे प्रभावित होगी।
सिटी गैस कंपनियों की चेतावनी
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि सप्लाई में लंबी कटौती रही तो कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अभी तक आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बाजार में यह चर्चा तेज है कि आने वाले हफ्तों में CNG और PNG के रेट ऊपर जा सकते हैं।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ लगभग बंद
सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। यह वही समुद्री रास्ता है जिससे कतर, यूएई और खाड़ी के अन्य देश तेल और गैस निर्यात करते हैं। ईरान-इजराइल टकराव के बाद यह रूट लगभग असुरक्षित हो गया है।
जहाजों की आवाजाही घटी
- 28 फरवरी को इस रास्ते से 91 जहाज गुजरे
- अब यह संख्या घटकर सिर्फ 26 रह गई है
भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रूट से मंगाता है। देश की प्रमुख गैस आयातक कंपनी Petronet LNG के तीन बड़े जहाज दिशा, राही और असीम फिलहाल कतर के रास लफान पोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
घरेलू बाजार पर क्या असर?
अगर सप्लाई 40% तक कम रहती है, तो CNG की कीमतें मेट्रो शहरों में बढ़ सकती हैं, PNG यानी रसोई गैस महंगी हो सकती है इंडस्ट्रियल गैस सप्लाई पर भी असर पड़ेगा बिजली उत्पादन लागत बढ़ सकती है ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास कुछ हफ्तों का बफर स्टॉक जरूर है, लेकिन लंबे संकट की स्थिति में कीमतों का दबाव बढ़ना तय है।
युद्ध का दायरा और असर
पिछले हफ्ते अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ठिकानों पर स्ट्राइक की थी। जवाब में ईरान ने यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया। अब असर सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सप्लाई चेन भी इसकी चपेट में है।
आम लोगों के लिए इसका मतलब साफ है अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में गाड़ी चलाना और रसोई चलाना, दोनों थोड़ा महंगा पड़ सकता है। फिलहाल सबकी नजरें खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर टिकी हैं।
