
रंग पंचमी के दिन उज्जैन की गलियां एक बार फिर रंगों से सराबोर दिखीं। ढोल-नगाड़ों की गूंज, गुलाल की उड़ती परतें और ‘जय महाकाल’ के जयकारों के बीच जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पारंपरिक गेर में शामिल हुए तो माहौल और भी उत्साह से भर गया.महाकाल मंदिर से निकलने वाली सदियों पुरानी इस परंपरा में मुख्यमंत्री ने न सिर्फ भाग लिया बल्कि ध्वजा पूजन किया, अखाड़ों के शस्त्रों की पूजा की और खुद शस्त्र चलाकर लोगों को चौंका भी दिया। उनके इस अनोखे अंदाज की तस्वीरें और वीडियो पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा में बने रहे।
बाबा महाकाल के दर्शन से की शुरुआत
रंग पंचमी की सुबह मुख्यमंत्री मोहन यादव सबसे पहले उज्जैन पहुंचे और महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन किए.मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की। इसके बाद जब पारंपरिक गेर की शुरुआत हुई तो मुख्यमंत्री भी श्रद्धालुओं के साथ उसमें शामिल हो गए.महाकाल की गेर उज्जैन की एक विशेष परंपरा है, जिसमें रंग पंचमी के दिन अखाड़ों, साधु-संतों और हजारों श्रद्धालुओं की टोली शहर में रंग-गुलाल उड़ाते हुए निकलती है।

ध्वजा और शस्त्रों का किया विधि-विधान से पूजन
गेर की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री ने अखाड़ों की परंपरा के अनुसार ध्वजा पूजन किया। इसके साथ ही पारंपरिक शस्त्रों की पूजा भी की गई.इस दौरान मुख्यमंत्री ने खुद शस्त्र चलाने का प्रदर्शन किया। पारंपरिक अंदाज में शस्त्र चलाते हुए उनका आत्मविश्वास देखने लायक था।जब उन्होंने शस्त्र चलाया तो आसपास मौजूद श्रद्धालु और कार्यकर्ता “हर-हर महादेव” के जयकारे लगाने लगे। पूरा माहौल भक्ति और उत्साह से भर गया।

जनता के साथ मनाई रंग पंचमी
गेर के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह उत्सव के रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने लोगों के साथ जमकर रंग-गुलाल उड़ाया।कई जगह लोगों ने मुख्यमंत्री पर गुलाल डाला तो उन्होंने भी मुस्कुराते हुए लोगों को रंग लगाया.इस दौरान बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी उत्साह से भरे दिखाई दिए। मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी लेने और उन्हें रंग लगाने के लिए लोगों की भीड़ भी उमड़ती रही।
प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
सीएम डॉ. मोहन यादव ने रंग पंचमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं।उन्होंने कहा कि रंगों का यह त्योहार जीवन में उत्साह और उल्लास लाने वाला है। सभी को प्रेम, भाईचारे और समरसता के साथ इसे मनाना चाहिए.उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि यह पर्व लोगों के जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए।
संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने की पहल
मुख्यमंत्री बनने के बाद से मोहन यादव लगातार प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं.उनका मानना है कि त्योहार केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं.इसी सोच के तहत राज्य सरकार कई पारंपरिक उत्सवों और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है।
उज्जैन की गेर क्यों है खास
उज्जैन की गेर केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान है.रंग पंचमी के दिन यह गेर महाकाल मंदिर से निकलकर शहर की प्रमुख गलियों से गुजरती है। ढोल-ताशों की गूंज, उड़ते गुलाल और ‘जय महाकाल’ के जयकारों के बीच हजारों लोग इसमें शामिल होते हैं.इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस परंपरा को और भी खास बना दिया।
