china nuclear test: साल 2020… एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी, अस्पतालों में हाहाकार था, लॉकडाउन ने ज़िंदगी थाम दी थी। दूसरी तरफ लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके थे। इसी उथल-पुथल के बीच अब एक ऐसा आरोप सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है। अमेरिका का दावा है कि गलवान घाटी में भारतीय जवानों की शहादत के ठीक कुछ दिन बाद ही चीन ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किए। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।
china nuclear test: अमेरिका का बड़ा आरोप
अमेरिका ने बीते शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से चीन पर यह गंभीर आरोप लगाए। अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी थॉमस जी डिनैनो ने कहा कि चीन ने ऐसे परमाणु परीक्षण किए, जिन्हें जानबूझकर दुनिया की नजरों से छिपाया गया.डिनैनो के मुताबिक, इन परीक्षणों को इस तरह अंजाम दिया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र, खासकर भूकंपीय निगरानी प्रणालियां (सीस्मिक मॉनिटरिंग सिस्टम), इन्हें ठीक से दर्ज न कर सकें। यानी धमाका हुआ, लेकिन दुनिया को भनक तक नहीं लगे, यही कोशिश थी।
china nuclear test: ‘डिकपलिंग’ तकनीक से किया गया परीक्षण
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि चीन ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया, उसे ‘डिकपलिंग’ कहा जाता है। इस तकनीक में परमाणु विस्फोट को इस तरह नियंत्रित किया जाता है कि उसके झटके कम महसूस हों और निगरानी एजेंसियों को शक न हो।अमेरिका का दावा है कि चीन न सिर्फ ऐसे परीक्षणों की तैयारी कर रहा था, बल्कि सैकड़ों टन क्षमता वाले परमाणु परीक्षण पहले ही कर चुका है। डिनैनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट कर इसे पूरी दुनिया के लिए खतरनाक करार दिया।
कब हुआ था यह परीक्षण
डिनैनो के अनुसार, 22 जून 2020 को चीन ने ऐसा ही एक परमाणु परीक्षण किया। यह तारीख इसलिए भी चौंकाने वाली है, क्योंकि यह गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के ठीक एक हफ्ते बाद की बताई जा रही है।गलवान संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। वहीं खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस झड़प में 30 से ज्यादा चीनी सैनिकों की भी मौत हुई थी, हालांकि चीन ने कभी आधिकारिक तौर पर यह आंकड़े स्वीकार नहीं किए।
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ट्रंप पहले ही दे चुके थे संकेत
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका की तरफ से इस तरह की बात सामने आई हो। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी संकेत दे चुके थे कि अगर रूस और चीन परमाणु परीक्षण करते हैं, तो अमेरिका भी उसी स्तर पर परीक्षण शुरू कर सकता है। हालांकि उस वक्त ट्रंप ने कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की थी। अब डिनैनो का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका न्यू स्टार्ट संधि के बाद रूस और चीन के साथ नई त्रिपक्षीय बातचीत की कोशिश कर रहा है।
सिर्फ आरोप नहीं, बड़ा संदेश
गलवान तनाव के तुरंत बाद कथित परमाणु परीक्षण का आरोप चीन की दीर्घकालिक रणनीति और मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है। यह मामला सिर्फ भारत-चीन संबंधों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी जैसा है.अब देखना होगा कि इन आरोपों पर चीन क्या सफाई देता है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे किस तरह से लेता है।
