वक्फ बोर्ड का नया आदेश
पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ में ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं कि कुछ मौलाना या इमाम निकाह पढ़ाने के लिए अत्यधिक नजराना या उपहार की मांग कर रहे थे। कुछ मामलों में यह राशि 5100 रुपये या उससे भी अधिक थी, और मना करने पर निकाह पढ़ाने से इनकार कर दिया जाता था। इस तरह की प्रथाओं ने न केवल सामाजिक असंतोष को जन्म दिया, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निकाह की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया।
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आदेश का उद्देश्य और कार्यान्वयन
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के इस आदेश के तहत अब कोई भी मौलवी या इमाम निकाह पढ़ाने के लिए 1100 रुपये से अधिक की राशि नहीं ले सकेगा। इस सीमा को लागू करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निकाह जैसी धार्मिक प्रक्रिया में किसी भी तरह का आर्थिक दबाव न हो। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह नियम सभी वक्फ संस्थाओं पर लागू होगा और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. सलीम राज ने कहा कि यह निर्णय समाज में एकरूपता लाने और धार्मिक प्रथाओं को शुद्ध रखने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने सभी मुतवल्लियों से इस आदेश का कड़ाई से पालन करने और अपने क्षेत्र में इसे लागू करने की अपील की है। साथ ही, आम लोगों से भी अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी किसी भी अनुचित मांग की शिकायत तुरंत वक्फ बोर्ड को करें।
Chhattisgarh Maulvi Fee Limit: भविष्य की संभावनाएं
इस आदेश का सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह एक राहत की खबर है, जो अक्सर निकाह जैसे अवसरों पर अनुचित आर्थिक बोझ का सामना करते हैं। यह कदम न केवल निकाह की प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि धार्मिक नेताओं और समुदाय के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगा।
पिछले कुछ वर्षों में, छत्तीसगढ़ में कई परिवारों ने इस तरह की शिकायतें दर्ज की थीं कि मौलवियों द्वारा मांगी गई भारी राशि के कारण निकाह में देरी हो रही थी। इस आदेश के बाद अब ऐसी शिकायतों में कमी आने की संभावना है। साथ ही, यह कदम अन्य राज्यों के वक्फ बोर्डों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है, जहां इस तरह की प्रथाएं प्रचलित हैं।
