सेना ने स्थापित की 14,300 फीट ऊंची प्रतिमा
भारतीय सेना ने चीन-भारत सीमा के नजदीक पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे 14 हजार 300 फीट की ऊंचाई पर महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की एक भव्य मूर्ति स्थापित की है। आपको बता दें कि यह मूर्ति चीन से सीमा पर जारी तनाव के बीच भारतीय सेना के साहस का प्रतीक बनकर उभरेगी। भारतीय सेना का कहना है कि यह मूर्ति छत्रपति शिवाजी के अडिग साहस और वीरता को समर्पित की गई है जो भारतीय सैन्य और सांस्कृतिक धरोहर का प्रेरणास्त्रोत है।

डेमचोक और देपसांग में हुआ था समझौता
मूर्ति का उद्घाटन उस समय पर हुआ है जब भारत और चीन के बीच डेमचोक और देपसांग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सैन्य वापसी का समझौता हो चुका है। इस समझौते के बाद दोनों देशों के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है जिससे सीमा पर तनाव में कमी आई है।

यह कदम भारत और चीन के बीच हालिया सैन्य समझौतों के प्रभाव को दर्शाता है। 5 मई 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़पों के बाद शुरू हुआ गतिरोध,सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद 2021 में शांत हुआ था और अब सैनिकों की वापसी पूरी कर ली गई है।
सैन्य शक्ति का प्रतीक है छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा
इस मूर्ति के माध्यम से भारतीय सेना ने छत्रपति शिवाजी की ऐतिहासिक धरोहर और सैन्य रणनीतियों को सम्मानित किया है। यह मूर्ति भारतीय सेना के संकल्प और वीरता का प्रतीक बनेगी और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और शिवाजी महाराज के विचारों से प्रेरित करेगी। पैंगोंग झील का यह क्षेत्र अब एक सांस्कृतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल बन गया है जो भारत की संप्रभुता की रक्षा करने की ताकत को दर्शाता है।
