जयशंकर का संदेश: ब्रिक्स समिट में व्यापार को नीतियों से मुक्त करने की ज़रूरत

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को ब्रिक्स समिट की इमरजेंसी वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने वैश्विक व्यापार नीति को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने व्यापार नीति को निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए फायदेमंद बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नाम लिए बिना यह कहा कि व्यापार में दिक्कतें खड़ी करने और लेन-देन को जटिल बनाने से कोई फायदा नहीं मिलेगा। उनका मानना था कि व्यापार को सुगम बनाना और सहयोग बढ़ाना आवश्यक है, जिससे सभी देशों को लाभ मिल सके।
ब्रिक्स देशों का एकजुट होकर संघर्ष करना होगा
ब्रिक्स समिट का उद्देश्य अमेरिका की टैरिफ नीतियों से उत्पन्न व्यापारिक चुनौतियों पर चर्चा करना था। अमेरिका ने भारत और ब्राजील जैसे देशों पर 50% तक टैरिफ लगाया है, जिससे व्यापार में रुकावटें आई हैं। इस संदर्भ में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि व्यापार युद्ध और टैरिफ युद्ध से विश्व अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया।
एस जयशंकर की 4 बड़ी बातें
- सप्लाई चेन को मजबूत करना: संकट के दौरान सामान की कमी से बचने के लिए देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्हें मजबूत और सुरक्षित सप्लाई चेन स्थापित करनी होगी, ताकि आवश्यक वस्तुएं समय पर उपलब्ध हो सकें।
- व्यापार घाटे का समाधान: भारत का सबसे बड़ा व्यापार घाटा ब्रिक्स देशों, खासकर चीन से है। एस जयशंकर ने इस मुद्दे को शीघ्र सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार संतुलित और फायदेमंद हो।
- वैश्विक संकटों में बड़े संगठन फेल: कोरोना महामारी, युद्ध और जलवायु संकट ने दुनिया को परेशान किया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े संगठन इन समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहे हैं। जयशंकर ने इन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
- राजनीतिक हस्तक्षेप से बचना: व्यापार को राजनीति से जोड़ने से नुकसान हो सकता है। जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स देशों को अपने आपसी व्यापार संबंधों की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि उसे राजनीतिक दबावों से मुक्त किया जा सके।
भारत की अध्यक्षता में बदलाव
भारत को 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता मिल रही है। यह जिम्मेदारी 1 जनवरी, 2026 से भारत को ब्राजील से मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की योजना साझा की। भारत का उद्देश्य ब्रिक्स को एक नए रूप में प्रस्तुत करना है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

- मानवता पहले: भारत ब्रिक्स को लोगों के हितों को प्राथमिकता देने वाला मंच बनाएगा।
- लचीलापन और नवाचार: भारत वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीकों और सहयोग पर जोर देगा।
- सतत विकास: जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाएगा।
- ग्लोबल साउथ की आवाज़: भारत विकासशील देशों के हितों को बढ़ावा देगा और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग करेगा।
- आतंकवाद विरोधी कदम: भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा।
ब्रिक्स समिट ने इस बार वैश्विक व्यापार नीतियों के बदलाव और सहयोग की आवश्यकता को महसूस किया है। जयशंकर ने जिस तरह से व्यापार को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का आह्वान किया, वही अब ब्रिक्स देशों की साझा रणनीति बननी चाहिए। आगे बढ़ते हुए, भारत की अध्यक्षता में BRICS देशों को एकजुट होकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा, ताकि सभी देशों के लिए लाभकारी और स्थिर व्यापारिक वातावरण तैयार हो सके।
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