राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन अब 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ रही है। सुभाष नगर से एम्स तक 6.22 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर चल रही इस टेस्टिंग का मकसद है — कॉमर्शियल रन से पहले हर तकनीकी और सुरक्षा मानक की पुष्टि करना।इस रफ्तार पर मेट्रो का फाइनल कमर्शियल रन भी इसी गति से किया जाएगा, जिससे भोपालवासियों को जल्दी, सुरक्षित और आरामदायक सफर की सुविधा मिल सकेगी।
अक्टूबर-नवंबर में हो सकता है मेट्रो शुभारंभ
मेट्रो स्टेशन के अधूरे कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। एम्स, अलकापुरी और डीआरएम तिराहा स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट गेट, सिविल वर्क, और इंटरनल डेवलपमेंट को सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर या नवंबर में भोपाल मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
तकनीकी जांच के दो चरण होंगे
RDSO (Research Design & Standards Organization) द्वारा मेट्रो का तकनीकी मूल्यांकन।
इसके बाद CMRS (Commissioner of Metro Rail Safety) द्वारा फाइनल निरीक्षण।
दोनों एजेंसियों की मंजूरी के बाद ही मेट्रो यात्रियों के लिए खोली जाएगी।
कई स्टेशन और ब्रिज का काम पूरा
सुभाषनगर से आरकेएमपी तक का ट्रैक पहले ही पूरा हो चुका है।
अलकापुरी, एम्स और डीआरएम तक मेट्रो अब पहुंच रही है।
दो बड़े स्टील ब्रिज की लोड टेस्टिंग मार्च में पूरी हो चुकी है।
2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट
भोपाल मेट्रो के पहले फेज में एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर का रूट प्रस्तावित है। इसमें से 6.22 किमी का प्रायोरिटी कॉरिडोर सबसे पहले तैयार किया जा रहा है।
मेट्रो स्टेशन होंगे एयरपोर्ट जैसे
कॉमर्शियल रन के बाद यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी फीलिंग दी जाएगी। हर स्टेशन पर:
फूड प्लाजा
ब्रांडेड स्टोर
डिजिटल टचपॉइंट
इन्हें तैयार करने के लिए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सिस्टम प्लानिंग शुरू कर दी है।
भोपाल में देरी क्यों हुई?
इंदौर मेट्रो पर पहले फोकस किया गया था। भोपाल में स्टेशन निर्माण, तकनीकी कार्यों और ब्रिज इंस्टॉलेशन में देरी के कारण कमर्शियल रन थोड़ी देर से शुरू हो रहा है। अब सभी काम अगस्त-सितंबर तक पूरे करने का टारगेट है।
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