bhopal toxic cough syrup seizure: छिंदवाड़ा में कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों के बाद अब प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है.भोपाल के दवा बाजार में मंगलवार को फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की टीम ने छापेमारी की है। सरकार ने जिन दो कफ सिरप रेस्पिफ्रेस डी और एएनएफ कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया है। FDA की टीम ने दवा दुकानों पर पहुंचकर इन कफ सिरप की बोतलें खोजकर जब्त कीं।
bhopal toxic cough syrup seizure: डी और एएनएफ की 80 बॉटल्स जब्त
10 बोतलों को सैंपल लेने सील किया, 80 की जब्ती FDA की टीम ने सैंपल के लिए 10 बोतल को सील किया और बाकी 80 बोतल को भी जब्त कर लिया। कफ सिरप री लाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर में खतरनाक केमिक डायएथिलीन ग्लाइकॉल की अधिक मात्रा पाई मिली थी।
bhopal toxic cough syrup seizure: जांच रिपोर्ट में खुलासा
मप्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था। 19 दवाओं के सैंपल्स की जांच में अब तक तीन कफ सिरप अमानक पाए गए हैं। इनमें से कोल्ड्रिफ कफ सिरप तमिलनाडु और री लाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर गुजरात में बनाए जाते हैं।
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कफ सिरप में इतनी होनी चाहिए डीईजी की मात्रा
छिंदवाड़ा मामला सामने आने के बाद कुल 19 दवाओं के नमूने जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं को भेजे गए थे. अब इनकी रिपोर्ट की आ गई है. रिपोर्ट के अनुसार री लाइफ में 0.616 प्रतिशत डायएथिलीन ग्लाइकोल पाया गया. वहीं रेस्पिफ्रेश टीआर में 1.342 प्रतिशत डायएथिलीन ग्लाइकोल मिला है. गाइडलाइन के मुताबिक कफ सिरप में डायएथिलिन ग्लायकोल की मात्रा 0.1 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यदि मात्रा अधिक हो तो ऐसे सिरप से किडनी फेल और ब्रेन डैमेज होने का खतरा रहता है.
bhopal toxic cough syrup seizure: बाजार से वापस मंगाई जा रही ये कफ सिरप
राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से कोल्डरिफ के बाद री लाइफ और रेस्पिफ्रेश टीआर कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही इन दवाओं को बाजार से वापस बुलाने के निर्देश दिए हैं. अब बाजार से यह दवा रीकॉल की जा रही है. यह दोनों सिरप गुजरात में बनते थे. स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी ने बताया कि “पूरे प्रदेश में औषधी निरीक्षण की गतिविधियां तेज कर दी गई हैं. जिन दवाओं पर शक है, उन्हें बाजार से वापस बुलाने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
bhopal toxic cough syrup seizure: स्वास्थय मंत्री का क्या था कहना
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी कहा है कि सरकार जनता के स्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती है. औषधियों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है.”
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