Bhopal AIIMS plasma theft: भोपाल के AIIMS (एम्स) अस्पताल में हुई प्लाज्मा चोरी की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी अंकित शामिल है, जो खुद एम्स के ब्लड बैंक में काम करता था।
यह चोरी पिछले 15 से 20 दिनों के अंदर की गई बताई जा रही है। पुलिस ने एम्स प्रशासन से इस अवधि के सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी कितनी बार और कब-कब हुई।

प्लाज्मा चोरी की पूरी कहानी
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एम्स प्रशासन को ब्लड बैंक से प्लाज्मा की गुमशुदगी का पता चला। जांच में पाया गया कि अस्पताल के अंदर से कई यूनिट प्लाज्मा गायब हैं।
मुख्य आरोपी अंकित, जो ब्लड बैंक में तकनीशियन के रूप में कार्यरत था, ने प्लाज्मा चोरी कर अपने साथी अमित और लक्की को बेचा।
- अंकित प्लाज्मा चोरी कर बाहर पहुंचाता था।
- अमित उस प्लाज्मा को आगे लक्की तक पहुंचाता था।
- लक्की इसे अलग-अलग अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में महंगे दामों पर बेचता था।
Bhopal AIIMS plasma theft: पुलिस की कार्रवाई
भोपाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर राउंडअप कर लिया है।
एसीपी रजनीश कश्यप ने बताया कि –
तीनों आरोपी मेडिकल फील्ड से जुड़े हुए हैं। मुख्य आरोपी अंकित एम्स में ही काम करता था और पूछताछ के दौरान उसने बताया यह चार से पांच बार और चोरी कर चुका है प्लाज्मा की आरोपी ने यह अस्पताल में जाकर देखते थे जिसको जरूरत होती थी उनको महंगे दाम पर प्लाज्मा बेचते थे। हमने एम्स प्रशासन से पिछले 15-20 दिनों के सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं ताकि यह पता चल सके कि चोरी की घटनाएं कब-कब हुई हैं। अगर पूछताछ में कोई अन्य आरोपी सामने आता है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
एसीपी ने बताया कि आरोपी अंकित आउटसोर्स कर्मचारी था जिसका 30 सितंबर को कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहा था और रिन्यू भी नहीं हो रहा था इस लिए आरोपी हॉस्पिटल से प्लाज्मा की चोरी कर उसे बेच रहा था
पुलिस का कहना है कि चोरी लगातार कई बार हुई, न कि सिर्फ एक दिन में। आरोपियों ने ब्लड बैंक के अंदर अपनी पहुंच का फायदा उठाकर सिस्टम को धोखा दिया और प्लाज्मा बाहर निकाल लिया।

कब हुई थी चोरी?
जांच के अनुसार, यह प्लाज्मा चोरी पिछले 15 से 20 दिनों के बीच की गई। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कई बार अलग-अलग शिफ्टों में प्लाज्मा को धीरे-धीरे बाहर निकाला, ताकि किसी को शक न हो।
एम्स प्रशासन को तब शक हुआ जब स्टॉक रिपोर्ट और उपयोग रिपोर्ट में अंतर पाया गया। इसी के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
प्लाज्मा की कीमत और ब्लैक मार्केटिंग
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में इस्तेमाल होने वाला प्लाज्मा मरीजों की जान बचाने में अहम होता है। आरोपी लक्की इसे ब्लैक मार्केट में 5 से 10 गुना ज्यादा कीमत पर बेचता था।
जिन अस्पतालों या निजी क्लीनिकों को तुरंत प्लाज्मा की जरूरत होती थी, वे बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के इसे खरीद लेते थे।
पुलिस की अगली जांच दिशा
Bhopal AIIMS plasma theft: अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि –चोरी किया गया प्लाज्मा किन अस्पतालों को बेचा गया?
क्या कोई निजी डॉक्टर या दलाल भी इसमें शामिल था?
और क्या एम्स के अन्य कर्मचारी भी इस गिरोह से जुड़े हुए थे?
इसके लिए पुलिस ने एम्स प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड्स सौंपने के निर्देश दिए हैं।
एसीपी रजनीश कश्यप ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
