भारत-पाक तनाव के बीच पूर्व सैनिकों का जज्बा
Barwani ex-servicemen spirit: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में कई निर्दोष पर्यटकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत के रिहायशी इलाकों में गोलाबारी की, जिसमें कई नागरिकों की जान गई। हालांकि अब दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है, लेकिन भारत का ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।
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बड़वानी के पूर्व सैनिकों ने दिखाई देशभक्ति
इस पूरे घटनाक्रम पर बड़वानी जिले के पूर्व सैनिक संगठन से जुड़े जवानों ने खुलकर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि वे अब भले ही सेवानिवृत्त हो चुके हों, लेकिन अगर देश उन्हें बुलाता है, तो वे फिर से सीमा पर जाने और देश के लिए लड़ने को तैयार हैं।

11 मेडल जीतने वाले पूर्व फौजी डोंगरे की गर्जना
पूर्व सैन्य डॉक्टर मुकेश कुमार डोंगरे, जो 1986 में सेना में भर्ती हुए थे, ने बताया कि उन्होंने सेवा काल में कुल 11 मेडल प्राप्त किए हैं, जिनमें आजादी के 50 साल का विशेष मेडल भी शामिल है। उन्होंने कहा, “देश के लिए जान देना कोई बड़ी बात नहीं, अगर आज भी जरूरत पड़े तो मैं मेडिकल ड्यूटी के लिए फौज में दोबारा लौटने को तैयार हूं।”
फिदायीन हमले का सामना कर चुके हैं संदीप सोनाने
पूर्व सैनिक संदीप सोनाने ने बताया कि उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू के अखनूर सेक्टर में थी, जहां उन्होंने 2007 में फिदायीन हमले का सामना किया था। इसके बाद वह अरुणाचल प्रदेश में भी तैनात रहे और 2012 में सेना से रिटायर हुए। उन्होंने कहा, “फौजी कभी रिटायर नहीं होता, वो देश के लिए हमेशा तैयार रहता है।”
‘अगर देश पुकारे, तो जान हाजिर है’

Barwani ex-servicemen spirit: बड़वानी के अन्य पूर्व सैनिकों ने भी एक स्वर में कहा कि वे फिर से देश के लिए सीमा पर लड़ने को तैयार हैं। उनका मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रवैया सही दिशा में उठाया गया कदम है, और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों को तब तक जारी रहना चाहिए जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।
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