जब ज़िंदगी रेत की तरह फिसलने लगे और पता भी ना चले…
कभी-कभी हम सोचते हैं कि सब ठीक चल रहा है नौकरी है, परिवार है, दोस्त हैं, पर फिर भी एक खालीपन सा क्यों महसूस होता है? जैसे कुछ छूट रहा है, जैसे हम खुद से दूर हो रहे हैं। ये महसूस करना कोई नई बात नहीं है। हम सब कभी न कभी इस दौर से गुजरते हैं। लेकिन कई बार इसकी असली वजह होती है कुछ आदतें, जो हमारे अंदर इतनी गहराई से बैठ जाती हैं कि हमें पता भी नहीं चलता कि वो हमें धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर रही हैं।

इस लेख में मैं आपको ऐसी ही 5 आदतों के बारे में बताऊंगा जो मैंने न सिर्फ दूसरों की ज़िंदगी में बर्बादी लाते देखी हैं, बल्कि खुद भी महसूस की हैं। अगर आप इन आदतों को अभी नहीं पहचानते और नहीं छोड़ते, तो एक दिन पछताना तय है।
बॉडी वो 5 आदतें जो हमारी ज़िंदगी को खराब कर रही हैं
1. हर बात पर ओवरथिंक करना (Overthinking)
सोचना अच्छी बात है, लेकिन जब सोच एक अंधेरी गली में ले जाए जहाँ से बाहर निकलना मुश्किल हो, तो वो सोच ज़हर बन जाती है।
रात को नींद नहीं आती क्योंकि दिमाग़ बार-बार वही बातें दोहराता है “क्या मैं अच्छा कर रहा हूँ?”, “क्या लोग मुझे पसंद करते हैं?”
कभी खुद से पूछा है ये सोच आपको कहां ले जा रही है?
रियल लाइफ रिफरेंस
मेरी एक दोस्त, जो कॉलेज में सबसे ब्राइट थी, उसने अपनी पहली नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी क्योंकि उसे लगा कि उसका बॉस उसे पसंद नहीं करता। सालों बाद पता चला बॉस ने तो उसे प्रमोशन के लिए सोचा था।
2. खुद को हर समय दूसरों से कंपेयर करना
“वो इतना ट्रैवल करता है”,
“उसकी शादी इतनी परफेक्ट है”,
“उसका इंस्टाग्राम कितना सुंदर है”
और हम?
हम भूल जाते हैं कि….
सोशल मीडिया सिर्फ हाइलाइट्स दिखाता है, पूरी फ़िल्म नहीं। किसी और की ज़िंदगी को देखकर अपनी कमियाँ ढूँढना, एक ऐसी दौड़ है जिसमें आप कभी जीत नहीं सकते।
3. ‘ना’ कहना न आना
किसी ने आपसे मदद मांगी, आपको पता है कि आप नहीं कर सकते,
फिर भी हाँ कह दिया क्यों?
सिर्फ इसलिए कि आप ‘अच्छा इंसान’ दिखना चाहते हैं?
यही चीज़ धीरे-धीरे आपको burnout की तरफ ले जाती है। याद रखिए ना कहना एक कला नहीं, एक ज़रूरत है।
4. अतीत में जीना और पछताना
“काश उस दिन मैंने वो नौकरी पकड़ ली होती…”
“काश मैं उस रिश्ते को छोड़ देता…”
हर कोई सोचता है ‘काश’,
लेकिन वर्तमान में जीना ही असली जिंदगी है। पछतावे की रेत में जितना पैर धँसाओगे, उतना डूबते जाओगे।
5. सेल्फ-केयर को नजरअंदाज़ करना
खुद के लिए वक्त निकालना कोई लग्ज़री नहीं है ये ज़रूरी है। हर दिन 15 मिनट भी अपने लिए निकालो चाहे वो किताब पढ़ना हो, टहलना हो या बस चुपचाप बैठना। आप जितना खुद से जुड़ेंगे, उतना ही ज़िंदगी से जुड़ाव महसूस करेंगे।

ज़िंदगी की तरफ लौटो, अभी भी देर नहीं हुई है
अगर आप इन आदतों में से किसी में भी खुद को पाते हैं, तो घबराइए मत। इसका मतलब ये नहीं कि आप फेल हो गए इसका मतलब है कि आप जाग गए हैं। जागना ही पहला क़दम है बेहतर इंसान बनने की ओर। हर किसी की ज़िंदगी में एक मोड़ आता है जब उसे रुक कर सोचना होता है क्या मैं सही रास्ते पर हूँ? अगर ये लेख आपके लिए वो मोड़ बन सके, तो समझिए मैंने अपना काम कर लिया।
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