Aravalli Hills News: राजस्थान में करीब 50 हजार वर्ग किमी में फैली अरावली पर्वतमाला लगभग 10 हजार सक्रिय खानों से छलनी हो रही है। अरावली में खनन को लेकर करीब 30 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, लेकिन कई अदालती हस्तक्षेपों के बावजूद जमीनी स्तर पर गतिविधियां नहीं रुकीं। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में फैली अरावली पर सियासत गरमा रही, पर संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं हुए। राजस्थान में अरावली क्षेत्र 1.13 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 50 हजार वर्ग किलोमीटर पहाड़ी हिस्सा शामिल है। बावजूद इसके, सरकारों ने संरक्षण के बजाय राजस्व को प्राथमिकता दी है।
Aravalli Hills News: रोक नहीं लगती तो हालात और बिगड़ते
अरावली का मामला लंबे समय से कोर्ट में लंबित होने के चलते पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से नई खानों के आवंटन पर रोक है। जो खानें चल रही हैं, वे दशकों पहले आवंटित की गई थीं। यदि नई खानों पर रोक नहीं लगाई जाती, तो अरावली का बड़ा हिस्सा अब तक पूरी तरह नष्ट हो चुका होता।
सीएम शर्मा ने कहा– कांग्रेस झूठ और लूट की राजनीति करती है और लोगों को अफवाहें फैलाकर बहकाने की कोशिश कर रही है. हमारी की सरकार अरावली की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी. साल 2002-2003 और साल 2009-2010 में कांग्रेस सरकार ने अरावली पर क्या परिभाषाएं बनाईं, वह देख लें. सीएम ने खुद को गिरिराज जी का भगत बताते हुए कहा कि वे गिरिराज को पूजते हैं और कांग्रेस को चिंता करने की जरूरत नहीं है.
Aravalli Hills News: कांग्रेस को घेरा
सीएम शर्मा ने कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली को चुनौती दी कि वह किसी भी मंच पर आ जाए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में एक भी लाइन दिखाएं, जहां 100 मीटर तक खनन की अनुमति दी गई हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने 100 मीटर के नियम को रोक दिया है और केंद्र सरकार को कमेटी बनाकर विस्तृत योजना बनाने का आदेश दिया है. इसमें पर्यावरण, खनन, संरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर विचार होगा.
अवैध खनन पर सख्ती
शर्मा ने बताया कि राजस्थान की BJP सरकार और केंद्र सरकार अरावली संरक्षण के लिए कटिबद्ध हैं. उन्होंने साल 2013 से पहले की कांग्रेस सरकारों की तुलना आज से करने को कहा. इस दौरान फॉरेस्ट रिजर्व और टाइगर रिजर्व की संख्या बढ़ी है. गहलोत के समय में अवैध खनन पर शिकायतें आती थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. अब BJP सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. हाल ही में 11 इंस्पेक्टरों को सस्पेंड और APO किया गया. शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के पास अब धरातल पर कुछ नहीं बचा, इसलिए वे भ्रम फैला रही है.
100 मीटर से कम पहाड़ अरावली का हिस्सा नहीं
इशु रिलेटिंग टु डेफिनेशन ऑफ अरावली हिल्स एक रेंजेस नाम से जारी फैसले में अरावली की नई परिभाषा बताई गई। CEC की उस परिभाषा को मान्यता दे दी गई जिसमें कहा गया की 100 मीटर से कम के पहाड़ अरावली का हिस्सा है ही नहीं।
कैसे बनी अरावली?
अरावली उस वक्त बनी जब इंडियन टेक्टॉनिक प्लेट युरेशियन टेक्टोनिक प्लेट से अलग हो रही थी। पहली बार जीवन इसी पर्वत पर पैदा हुआ। लेकिन अब उसी अरावली की परिभाषा बदल दी गई।
फॉरेस्ट ठफ इंडिया की 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक 1281 पहाड़ थे जिनमें से केवल 1048 पहाड़ ही सुप्रिम कोर्ट के 100 मीटर के नए बेंच मार्क को पार कर पाए, यानी 90% हिस्से को अरावली माना ही नहीं जाएगा।
और कमाल की बात तो ये है कि जिस पटिशन के चलते अरावली की नई परिभाषा तय की गई उसका अरावली से कोई सीधा लेना देना था ही नहीं।
