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क्यों आज भी गांव की मिट्टी में छुपा है असली सुख: एक कहानी जो आपकी आंखें नम कर देगी
village life: शाम होते ही चौपाल पर बैठने की होड़
गांव के रामू काका, जो सालों से हल चला रहे हैं, उनके चेहरे पर जितनी संतुष्टि है, उतनी तो शायद एक कॉरपोरेट ऑफिस के CEO के पास भी नहीं होती। न टीवी है, न Netflix, फिर भी शाम होते ही चौपाल पर बैठने की होड़ रहती है। लोग मिलते हैं, बात करते हैं, हँसते हैं, रोते हैं – एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बनते हैं। Read More:- Self-love: क्या आप भी दूसरों को खुश करते-करते खुद को भूल चुके हैं?एक बार दादी ने कहा था, बेटा, पैसा सब कुछ हो सकता है, पर जब खाट पर लेटकर आम के पेड़ की छांव में नींद आती है, तो वो सुख रुपयों से नहीं आता। तब समझ आया कि असली अमीरी क्या होती है।शहर में जहां लोग अकेलेपन से जूझते हैं, वहीं गांव में पड़ोसी आपको बेटे की तरह मानते हैं। एक बार की बात है, मेरी मां बीमार पड़ीं और गांव की आधी महिलाएं घर पर दवा और खाना लेकर आ गईं। ऐसा अपनापन – क्या किसी मेट्रो सिटी की सोसाइटी में देखा है?