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गणेश विसर्जन में मातम: ट्रक ने रौंद डाला जुलूस, 9 की मौत, 20 घायल

रंग-बिरंगे लाइट्स, ढोल-नगाड़ों की गूंज, और “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से गूंजती सड़क…जश्न चल रहा था, लेकिन चंद सेकंड में सब कुछ बदल गया। संगीत थम गया, और उस जगह को चीखों और खून से लथपथ अफरा-तफरी ने घेर लिया। ये कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि कर्नाटक के हासन जिले का दर्दनाक सच है, जहां शुक्रवार रात गणेश विसर्जन के दौरान एक बेकाबू ट्रक ने 9 जिंदगियों को कुचल डाला और 20 से ज्यादा को घायल कर दिया।

 कहां और कब हुआ हादसा?

हासन ज़िले के मोसाले होसाहल्ली गांव में रात करीब 8:45 बजे, लोग उत्साह के साथ भगवान गणेश के विसर्जन के लिए सड़कों पर जश्न मना रहे थे। DJ की धुन पर युवा नाच रहे थे, महिलाएं थाल सजा रही थीं, बच्चे ढोल पर थिरक रहे थे। तभी, अरकलगुडु की ओर से आ रहा एक ट्रक अचानक जुलूस में घुस गया। लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया, जब तक किसी ने कुछ कहा ट्रक भीड़ को कुचल चुका था।

चश्मदीदों की आंखों से

एक युवक, जिसकी आंखें अभी भी सदमे में थीं, बोला:

सब कुछ पलक झपकते हुआ। हम डांस कर रहे थे, अचानक शोर मचा ‘ट्रक-ट्रक!’ मैंने मुड़कर देखा तो दोस्त पहिए के नीचे था… 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। ज़्यादातर युवा लड़के थे जो शायद पहली बार विसर्जन में DJ लेकर शामिल हुए थे।

20 से ज्यादा घायल अस्पताल में भर्ती

स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। घायलों को नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती किया गया है। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल के बाहर रोते-बिलखते परिजनों की भीड़ लगी है।

सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिवार को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 मुआवज़ा देने का ऐलान किया है।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा:

ये एक अकल्पनीय त्रासदी है। पर्व और पूजा के इस पवित्र समय में ऐसा हादसा हर किसी का दिल तोड़ देता है। मैं ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।

विसर्जन जुलूसों में सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाता है?

स्थानीय प्रशासन को पहले से ट्रैफिक रोकना चाहिए था?

क्या आयोजकों के पास ट्रैफिक कंट्रोल या वॉलींटियर्स की व्यवस्था थी?

अक्सर हम जिम्मेदारी सिर्फ सरकार पर डाल देते हैं पर क्या समाज भी जवाबदेह नहीं?

हर साल, गणेश चतुर्थी लाखों दिलों में खुशी, आस्था और उम्मीद की लौ जलाता है। लेकिन इस बार हासन के इस गांव में ये लौ आंसुओं में बुझ गई। हम जश्न मनाएं ज़रूर, लेकिन सावधानी, सुरक्षा और संवेदनशीलता के साथ। क्योंकि एक ट्रक सिर्फ 9 जिंदगियां नहीं रौंदता, पूरे गांव की रूह कुचल देता है।
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