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बांग्लादेश: पाकिस्तानी जनरल को विवादित नक्शा गिफ्ट किया, भारत के हिस्से दिखाए

बांग्लादेश का विवादित नक्शा मामला: यूनुस ने पाक जनरल को दिया गिफ्ट

bangladesh map controversy: ढाका में शनिवार रात हुई एक उच्चस्तरीय मुलाकात ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को एक ऐसी किताब उपहार में दी, जिसके कवर पर छपा नक्शा विवाद का कारण बन गया है। इस नक्शे में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश के भूभाग में दर्शाया गया है। भारत सरकार ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इस कदम को “संवेदनशील और उकसाने वाला” माना जा रहा है।

किताब का नाम और विवाद का कारण

यूनुस द्वारा गिफ्ट की गई किताब का नाम है “आर्ट ऑफ ट्रायम्फ”, जिसे उन्होंने 2024 में जारी किया था। यह एक आर्ट बुक है, जिसमें 2024 के छात्र-जन आंदोलन के दौरान ढाका और अन्य शहरों की दीवारों पर बनी चित्रकारी (ग्रैफिटी) और पोस्टरों को संकलित किया गया है। किताब के कवर पर बना बांग्लादेश का नक्शा ही विवाद का कारण बना। इसमें भारत के कई हिस्सों को बांग्लादेश में शामिल दिखाया गया है। यह नक्शा पहले भी बांग्लादेश के कुछ सरकारी सलाहकारों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसे बाद में विरोध के चलते हटाया गया था।

पाकिस्तानी जनरल से मुलाकात का संदर्भ

पाकिस्तान जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन जनरल साहिर शमशाद मिर्जा 24 अक्टूबर को छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ढाका पहुंचे थे। उन्होंने बांग्लादेश के उच्च सैन्य और नागरिक नेतृत्व से मुलाकात की। बैठक में रक्षा, निवेश और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। जनरल मिर्जा ने कहा कि “दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध” हैं और इन्हें और मजबूत करने की आवश्यकता है।

कूटनीतिक अर्थ और संकेत

यह पहली बार नहीं है जब यूनुस ने यह किताब विदेशी नेताओं को उपहार में दी हो। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, आर्ट ऑफ ट्रायम्फ अब तक 12 से अधिक विदेशी नेताओं को भेंट की जा चुकी है, जिनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जैसे नाम शामिल हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस पुस्तक का उपयोग “सॉफ्ट पॉलिटिकल मेसेजिंग” के रूप में किया जा रहा है। यानी, प्रत्यक्ष रूप से कुछ न कहते हुए भी यह बताया जा रहा है कि बांग्लादेश का नजरिया अपने पड़ोसियों के प्रति किस दिशा में झुक रहा है। Read More:- Self-love: क्या आप भी दूसरों को खुश करते-करते खुद को भूल चुके हैं?