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'Metro In Dino' Review: 4 शहर, 5 कहानियां और रिश्तों की उलझने..जानिए फिल्म की कहानी और रिव्यू...

'Metro In Dino' Review: अनुराग बसु की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘मेट्रो इन दिनों’ 5 जुलाई को रिलीज हो गई है। इसके ट्रेलर व प्रमोशन को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखा गया। हालांकि, पहले दिन की कमाई ₹3.25 करोड़ के आसपास ही रही, जो कि फिल्म की मजबूत स्टारकास्ट और थीम को देखते हुए औसत मानी जा रही है। इस पर लोगो के मिले जुले रिएक्शन सामने आ रहें हैं, आइए बताते है फिल्म की कहानी और लोगों की प्रतिक्रियाएं।

 

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रिश्तों की उलझनों से बुनी गई संवेदनशील कहानियां...

‘मेट्रो इन दिनों’ की कहानी चार अलग-अलग कपल्स के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो चार अलग-अलग शहरों — मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और बेंगलुरु — में रहते हैं। सभी कहानियों में एक कॉमन भावना है – रिश्तों की उलझन, प्यार की तलाश और खुद से जुड़ने की जद्दोजहद।

मुंबई - मोंटी और काजोल की उथल-पुथल भरी शादीशुदा जिंदगी

मोंटी (पंकज त्रिपाठी) और काजोल (कोंकणा सेन शर्मा) बाहर से देखने पर एक खुशहाल कपल लगते हैं, लेकिन उनके रिश्तों में गहराई से दरारें हैं। उनके घर की शांति में बेटी का भी एक एंगल शामिल है, जो आज की पीढ़ी के मानसिक और भावनात्मक संघर्षों को दर्शाता है। यह कहानी विवाह के भीतर के अनकहे दर्द और समझौतों की परतें खोलती है।

कोलकाता – 40 साल की शादी और अधूरी भावनाएं...

शिवानी (नीना गुप्ता) और संजीव (सास्वत चटर्जी) की शादी को चार दशक हो चुके हैं, पर क्या वाकई में वे खुश हैं? जब शिवानी को अपने कॉलेज रीयूनियन के दौरान अपने पहले प्यार परिमल (अनुपम खेर) की याद आती है, तो बीते हुए पलों की कसक और वर्तमान की उलझनें एक भावुक टकराव पैदा करती हैं। यह कहानी बताती है कि वक्त गुजर जाता है, पर अधूरे एहसास कभी बूढ़े नहीं होते।

दिल्ली–बेंगलुरु – आज की पीढ़ी का कन्फ्यूजन...

चुमकी (सारा अली खान) दिल्ली में नौकरी करती है और अपने लॉन्ग टाइम बॉयफ्रेंड आनंद से शादी करने वाली है। लेकिन वह खुद भी नहीं जानती कि उसे क्या चाहिए। तभी उसकी मुलाकात बेंगलुरु के रहने वाले पार्थ (आदित्य रॉय कपूर) से होती है, जो उसे खुद की पहचान और भावनाओं की गहराई से परिचित कराता है। यह कहानी आज के युवाओं के रिश्तों में असमंजस, आत्म-संदेह और विकल्पों के द्वंद्व को उजागर करती है। श्रुति और आकाश (मुंबई)

मुंबई – करियर और प्यार की दो राहें...

आकाश (अली फजल) और श्रुति (फातिमा सना शेख) एक-दूसरे से प्यार करते हैं और शादीशुदा हैं, लेकिन जिंदगी की प्राथमिकताएं उनके रिश्ते को हिला देती हैं। श्रुति मां बनना चाहती है, जबकि आकाश अपने म्यूजिक के पैशन को अपनाना चाहता है। दोनों अपने-अपने रास्तों पर बढ़ना चाहते हैं लेकिन साथ बने रहना भी चाहते हैं। यह कहानी रिश्तों और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दर्शाती है।

परिमल और उनकी बहू: अकेलेपन में भी अपनापन...

अनुपम खेर द्वारा निभाया गया परिमल अपनी विधवा बहू के साथ कोलकाता में अकेले रहते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी बहू ज़िंदगी को फिर से शुरू करे, लेकिन वह अपने दिवंगत पति से किए गए वादे को निभाने के लिए परिमल के साथ ही रहती है। यह कहानी इस बात पर रोशनी डालती है कि कैसे कुछ रिश्ते व्यक्तिगत सुख से ऊपर उठकर निःस्वार्थ अपनापन और बलिदान में ढल जाते हैं।

मंझे हुए कलाकारों की शानदार परफॉर्मेंस...

1. अनुपम खेर और नीना गुप्ता ने अपने किरदारों में जान डाल दी है। उनका अभिनय भावनाओं की गहराई को बेहतरीन ढंग से दर्शाता है। 2. कोंकणा सेन शर्मा का किरदार layered है और वो हर स्तर पर सशक्त नजर आईं। वहीं पंकज त्रिपाठी अपने स्टाइल में बिल्कुल सहज दिखे। 3. फातिमा सना शेख ने प्रभावशाली परफॉर्मेंस दी है। वहीं अली फजल ने एक गंभीर लेकिन संवेदनशील रोल निभाया है। 4. सारा अली खान की परफॉर्मेंस को सबसे कमजोर माना जा रहा है। एक्सप्रेशंस में नयापन और गहराई की कमी साफ झलकती है। 5. आदित्य रॉय कपूर ने अपने किरदार में अच्छा संतुलन बनाए रखा, हालांकि ये रोल उन्हें पहले भी निभाते देखा गया है।

निर्देशन और टेक्निकल पक्ष...

अनुराग बसु ने इस बार फिर रिश्तों की उलझनों को बड़े ही सलीके और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है। फिल्म में मेट्रो शहरों की खूबसूरती, लोगों की व्यस्तता और भावनात्मक खालीपन को गहराई से दिखाया गया है। संगीत और सिनेमैटोग्राफी में अनुराग की छाप साफ नजर आती है। वाइड एंगल शॉट्स, बैकग्राउंड स्कोर और सिटी लाइफ से फिल्म और प्रभावशाली बनी है। हालांकि कुछ कहानियां जल्दबाज़ी में समेटी गई लगती हैं, जो दर्शकों को थोड़ा अधूरा सा एहसास दे सकती हैं।

क्यों देखें ये फिल्म?

अगर आप रिश्तों, भावनाओं और असल जिंदगी की उलझनों को स्क्रीन पर महसूस करना पसंद करते हैं तो 'मेट्रो इन दिनों' आपके लिए है। यह फिल्म एक बार फिर आपको एहसास कराएगी कि रिश्ते आसान नहीं होते, लेकिन उनकी अहमियत जिंदगी में सबसे ऊपर है। फैंस के फिल्म पर रिएक्शन्स... एक यूजर ने लिखा कि - " "मेट्रो… इन डिनो" प्यार, दिल टूटने और कनेक्शन को खूबसूरती से दर्शाता है — सब कुछ एक ही फ्रेम में। यह आज की दुनिया के लिए एकदम सही कहानी है, जो घर की याद दिलाती हैं और हर किरदार ऐसा लगता है जैसे आप उन्हें जानते हों। इस आधुनिक कहानी में डूब जाएं और इसे महसूस करें। ?❤️ एक यूजर ने लिखा कि - AnuragBasu ने ऐसी प्रेम कहानियां बुनी हैं जो वास्तविक, कच्ची और प्रासंगिक लगती हैं ?...