सनातन

Correct Direction of Placing Shivling: घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं? इस दिशा में रखें शिवलिंग...

Correct Direction of Placing Shivling: हिंदू धर्म में भगवान शिव को कल्याणकारी, कालों काल महाकाल, देवों के देव महादेव मानते हैं। घर में अगर भगवान शिव विराजमान हो तो सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सुख -शांति आती है। लेकिन वास्तु शास्त्र में शिवजी की मूर्ति या शिवलिंग की स्थापना के कुछ खास नियम बनाए गए हैं। अगर इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाए तो घर में तनाव, अशांति और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए पूजा से पहले इन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना बहुत जरुरी है। Read More: Akshaya Navami 2025: अक्षय नवमी पर करें ये उपाय, मिलती है मां लक्ष्मी की कृपा!

किस दिशा में रखें शिव जी की मूर्ति?

वास्तु शास्त्र के अनुसार भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में ही स्थापित करना चाहिए। यह दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। शिव जी की मूर्ति ऐसी जगह रखें, जहां शांति हो और किसी प्रकार का शोर-शराबा न हो। और मूर्ति इस प्रकार रखें कि भगवान शिव का मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे। ऐसा करने से शिव कृपा का प्रवाह पूरे घर में फैलता है।

मूर्ति का आकार और स्वरुप कैसा होना चाहिए?

1. पूजा घर में बहुत बड़ी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। 2. घर के लिए 5 से 8 इंच आकार की मूर्ति शुभ मानी जाती है। 3. शांत और ध्यानमग्न मुद्रा वाली शिव मूर्ति ही घर में रखें। 4. तांडव मुद्रा वाली शिव मूर्ति घर में बिल्कुल भी न रखें, ऐसा माना जाता है कि इससे घर में बेचैनी और विवाद बढ़ सकते हैं। 5. मूर्ति पत्थर, क्रिस्टल, पीतल या पंचधातु की बनी हो तो अधिक शुभ होता है।

शिवलिंग स्थापित करने के नियम...

घर में शिवलिंग की स्थापना बेहद शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि शिवलिंग से दिव्य ऊर्जा का प्रवाह होता है और घर में सुख-समृद्धि, शांति और स्वास्थ्य बना रहता है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार शिवलिंग की स्थापना करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना अनिवार्य है। गलत तरीके से स्थापित शिवलिंग अशुभ परिणाम भी दे सकता है।

शिवलिंग की सही दिशा...

1. शिवलिंग हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में ही स्थापित करना चाहिए। 2. यह दिशा भगवान शिव की प्रिय दिशा मानी जाती है और पूजा के लिए सबसे पवित्र मानी जाती है।

आधार आवश्यक...

1. शिवलिंग के नीचे योनिपीठ (आधार भाग) अवश्य होना चाहिए। 2. बिना आधार के शिवलिंग स्थापित करना वास्तु दोष माना जाता है।

जल निकासी की दिशा का ध्यान रखें...

1. शिवलिंग में जल चढ़ाने के बाद जो जल बाहर निकलता है उसे जलाधारी कहा जाता है। 2. जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए, यही वास्तु का सबसे महत्वपूर्ण नियम है।

पूजा विधि और नियम...

1. प्रतिदिन स्नान के बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल, गंगाजल, दूध, शहद या दही अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 2. बेलपत्र, धतूरा, अक्षत (चावल), सफेद चंदन और भस्म अर्पित करने से शिव कृपा प्राप्त होती है। 3. पूजा के समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप अवश्य करें।

पूजा स्थान के लिए आवश्यक नियम...

1. शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग सीधे फर्श पर न रखें—उसे लकड़ी या संगमरमर के चौकी पर स्थापित करें। 2. पूजा स्थान सदैव स्वच्छ और सुव्यवस्थित होना चाहिए। 3. मूर्ति को ऐसी जगह न रखें जहां जूते-चप्पल या गंदगी हो। 4. मूर्ति के आसपास धूप या कपूर ज़रूर जलाएं, यह नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है।

किन गलतियों से बचें?

1. एक घर में एक से अधिक शिवलिंग नहीं रखने चाहिए। 2. टूटी हुई मूर्ति या शिवलिंग की पूजा न करें। 3. शिवजी की मूर्ति को शयनकक्ष (बेडरूम) में न रखें। 4. मूर्ति को रसोई या बाथरूम के पास रखना भी अशुभ माना जाता है। 5. भैरव रूप या रौद्र रूप वाली तस्वीरें घर में लगाने से बचना चाहिए।