
अलीगढ़ के हादसे ने 5 जिंदगियां लील लीं
कभी सोचा है कि एक सेकंड की चूक या किस्मत की एक चाल किसी की पूरी दुनिया उजाड़ सकती है?
अलीगढ़ से आई ये खबर महज एक दुर्घटना नहीं, एक दिल तोड़ देने वाली त्रासदी है जिसने चार दोस्तों और एक बेकसूर कैंटर ड्राइवर को आग की लपटों में जिंदा झोंक दिया।
सुबह का वक्त था, रास्ता हाईवे का… और फिर कुछ ऐसा हुआ जिसे सोचकर रूह कांप उठे।
हादसा जिसने ज़िंदगी को राख में बदल दिया
मंगलवार की सुबह करीब 530 बजे, अलीगढ़ के अकराबाद थाना क्षेत्र के गोपी पुल के पास एक सीएनजी कार 100 की रफ्तार से दौड़ रही थी। उसमें सवार थे पांच दोस्त सबके चेहरे पर सपने थे, दिलों में हंसी और शायद कोई कॉलेज प्लान या ट्रिप का जोश।
पर किसे पता था कि उस स्पीडिंग कार का एक टायर अचानक फट जाएगा, कार बेकाबू होकर डिवाइडर तोड़ते हुए रॉन्ग साइड चली जाएगी और सामने से आ रहे कैंटर से भिड़ जाएगी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते आग भड़क उठी। राहगीरों ने एक युवक को किसी तरह खींचकर बाहर निकाला लेकिन बाकी सबकुछ जलकर खाक हो चुका था। कार और कैंटर धधकते रहे… और उनके साथ पांच परिवारों की उम्मीदें भी।

वो जो चले थे साथ, अब कभी लौटकर नहीं आएंगे
मरने वालों में चार दोस्त थे, जो हाथरस के रहने वाले थे। उनमें से दो मौसेरे भाई थे एक घर, एक खून, एक हादसा।
- अतुल यादव (19)
- देव शर्मा (22)
- हर्षित माहेश्वरी (19)
- मयंक उर्फ मोनू (22)
- और कैंटर चालक राजेश (35)
बचाने की कोशिश की गई, आग बुझाने में 20-25 मिनट लग गए, लेकिन तब तक सिर्फ कंकाल बचे थे। पुलिस ने उन्हें बॉडी बैग में भरकर मॉर्च्युरी भेजा।
एक दोस्त बच गया…
सुमित कुमार इस हादसे का इकलौता जीवित चेहरा। वही जिसे प्रत्यक्षदर्शी सत्यभान ने खींचकर बाहर निकाला। लेकिन उसकी हालत नाजुक है। सुमित के सामने उसके मौसेरे भाई अतुल को जलते देखना शायद उससे कभी भुलाया नहीं जाएगा।
प्रत्यक्षदर्शी बोले – ‘मेरे सामने जिंदा जल गए सब’
सत्यभान, जो हादसे के वक्त पास ही थे, ने बताया
मैं दौड़कर पहुंचा, एक लड़के को खींचा… आग लग गई… कुछ कर ही नहीं पाए। मेरी आंखों के सामने वो सब जिंदा जल गए।
ये शब्द सिर्फ बयान नहीं, बल्कि उस असहायता की चीख हैं, जो हादसे के गवाहों के दिलों में हमेशा रहेगी।

हाईवे बना नरक, ट्रैफिक जाम, जली हुई गाड़ियां
घटना के बाद हाईवे जाम हो गया। पुलिस, फायर ब्रिगेड, क्रेन सब पहुंचे, लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका था। कार की नंबर प्लेट तक जल चुकी थी। अब पहचान चेसिस नंबर से की जा रही है।
तेज रफ्तार, टायर फटने का डर और CNG का खतरा सबक क्या है?
यह महज ‘एक एक्सीडेंट’ नहीं था। ये एक चेतावनी है कि रफ्तार ज़िंदगी नहीं देती, छीन लेती है।
CNG कारों में अक्सर तेज टक्कर के बाद ब्लास्ट और आग लगने की घटनाएं होती हैं। और जब टायर फटता है तो गाड़ी का संतुलन एक सेकंड में खत्म हो जाता है।
तो क्या हमारे पास कुछ सीखने का वक्त बचा है?
- रफ्तार पर काबू रखें
- टायर की समय-समय पर जांच करवाएं
- लंबी यात्रा से पहले वाहन की फिटनेस चेक कराएं
- सीट बेल्ट पहनें हमेशा
बेटा हंसते हुए घर से निकाला था… वापसी कफन में हुई
सोचिए, वो मां जो बेटे की स्कूल की तस्वीर संभालकर रखती है। वो बाप जो बाइक दिलाने की बात सोच रहा था। उन घरों में आज बस सन्नाटा है… राख है… और सवाल है अगर वो थोड़ा धीरे चला होता तो?
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