तीन मंत्रालयों ने राज्यों को जारी की एडवाइजरी

आवारा कुत्तों की संख्या और नियंत्रण पर विशेष ध्यान
11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों के भीतर सड़कों से हटाने और शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद देश भर में यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आया, और अब केंद्र सरकार ने इस पर नियंत्रण पाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
केंद्र सरकार की नई एडवाइजरी
केंद्र सरकार ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के सहयोग से एक मास्टर एक्शन प्लान तैयार किया है। सरकार ने सभी राज्यों को इस प्लान के तहत एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में बताया गया है कि देश में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं, और उनका नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए अगले एक साल में 70% आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी किया जाएगा।

इसके अलावा, 2019 की पशु गणना के अनुसार, देश में 50 लाख बेसहारा पशु हैं। इस अभियान में पहली बार ग्राम पंचायतें भी शामिल होंगी। अभियान में एनिमल वेलफेयर बोर्ड को राज्यों की मदद करने को कहा गया है।
आवारा कुत्तों के लिए ग्रीन टैग कॉलर और सख्त नियम
इस अभियान के तहत आवारा कुत्तों को ग्रीन टैग कॉलर पहनाए जाएंगे, जिस पर कुत्ते के वैक्सीनेशन और नसबंदी की जानकारी होगी। ये सूचना पशुधन पोर्टल पर भी दर्ज की जाएगी, ताकि नगर निकायों को यह पता चल सके कि किस कुत्ते को पकड़ा जाना है और किसे नहीं। इसके अलावा, बेसहारा पशुओं के कान में हरा टैग लगाने का भी निर्णय लिया गया है।
इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवारा कुत्तों के मामले में कोई भी असामाजिक तत्व परेशानी उत्पन्न न करें और सभी जानवरों का उचित तरीके से इलाज हो सके।
आवारा कुत्तों को हटाना क्रूरता है ?
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह “बेजुबान पशुओं के प्रति क्रूरता” है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “शेल्टर्स, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल अपनाया जाना चाहिए। इससे बिना क्रूरता के भी डॉग्स को सुरक्षित रखा जा सकता है।” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पूरी तरह से पाबंदी “क्रूर और अदूरदर्शी” है, और इससे हमारी दया भावना खत्म हो सकती है।

कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को सिर्फ हटाना ही समाधान नहीं हो सकता; बल्कि उनकी सुरक्षा, देखभाल और इलाज के लिए एक मानवीय नीति तैयार की जानी चाहिए, जो जन सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों का संतुलन बनाए।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और रेजिस्टेंस
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में कहा था कि कोई भी आवारा कुत्ता सड़कों पर वापस नहीं लौटेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने उन व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी जो इस प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट डालेंगे।
इस आदेश के बाद, राजस्थान हाई कोर्ट ने भी शहरी सड़कों से आवारा कुत्तों और पशुओं को हटाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पशु प्रेमियों से यह भी सवाल किया कि क्या वे उन बच्चों को वापस ला सकते हैं जो रेबीज जैसी बीमारी का शिकार हुए हैं? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों को किसी भी कीमत पर रेबीज नहीं होना चाहिए।
क्या है इस कदम का उद्देश्य?
केंद्र सरकार का उद्देश्य आवारा कुत्तों से होने वाले हमलों, डॉग बाइट्स, और रेबीज जैसी खतरनाक बीमारियों के मामलों को नियंत्रित करना है। यह मुद्दा विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में गंभीर बन गया है, जहां कुत्तों की बढ़ती संख्या के कारण नागरिकों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, यह कदम सख्त तो है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या यह समाधान बेजुबान जानवरों के अधिकारों के खिलाफ नहीं होगा? क्या कुत्तों के लिए शेल्टर होम पर्याप्त होंगे? इस मुद्दे पर चर्चा और समाधान की आवश्यकता बनी हुई है।
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