अब सफर में सिर्फ दूरी नहीं, साफ-सुथरे एहसास भी होंगे
railway bedroll blanket: रेलवे ने सुन ली यात्रियों की वो अधूरी शिकायत, जो अक्सर अनसुनी रह जाती थी। कभी याद है वो ठंडी रात जब ट्रेन के एसी कोच में ठिठुरते हुए कंबल में खुद को लपेटने की कोशिश कर रहे थे? ऊपर से वो अजीब सी महक... जिसने नींद की जगह बेचैनी दे दी थी। ऐसे अनुभव हर भारतीय रेलयात्री के हिस्से में एक बार तो जरूर आए होंगे। लेकिन अब भारतीय रेलवे ने आपकी इस परेशानी को दिल से समझा है – और लाया है एक छोटा लेकिन बेहद असरदार बदलाव।
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जयपुर-असर्वा एक्सप्रेस
राजस्थान के खातीपुरा जयपुर स्टेशन से चलने वाली जयपुर-असर्वा एक्सप्रेस के एसी कोच में अब यात्रियों को कंबल के साथ मिलेगा एक स्पेशल प्रिंटेड कवर। ये कोई दिखावा नहीं, बल्कि साफ-सफाई और हाइजीन के उस मानक की शुरुआत है जिसकी हमें सालों से ज़रूरत थी।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद इस सुविधा की शुरुआत की और इसे पायलट प्रोजेक्ट बताया। उनका मानना है
"कंबल सालों से मिल रहे हैं, पर उसकी सफाई पर हमेशा संदेह रहता था। अब ये संदेह खत्म करना ज़रूरी है।"और ये सिर्फ कंबल कवर नहीं है, ये एक सोच की शुरुआत है। एक ऐसा भारत जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिर्फ सस्ता नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुकून भरा भी हो। कोरोना के दौरान जब बेडरोल की सुविधा बंद हुई, तब बहुतों ने महसूस किया कि ये छोटी सी चीज भी कितनी बड़ी राहत देती है। अब जब ये दोबारा शुरू हुई, तो रेलवे ने उसमें सुधार करना ज़रूरी समझा।