trump secret news: अमेरिका दुनिया की कथित महाशक्ति आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां सेना के जवानों की तनख्वाह जुटाने के लिए निजी दान पर निर्भर होना पड़ रहा है। यह बात सुनने में अविश्वसनीय लगती है, लेकिन सच यही है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने पुष्टि की है कि उसे 130 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,100 करोड़ रुपये का एक गुप्त दान मिला है। यह पैसा अमेरिकी सैनिकों की सैलरी देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

ये दान किसी आम व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक रहस्यमय दोस्त ने दिया है। ट्रम्प ने खुद इस व्यक्ति को “सच्चा देशभक्त” बताया, लेकिन उसका नाम उजागर करने से साफ इनकार कर दिया। ट्रम्प का दावा है कि दानदाता अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता है। लेकिन सवाल तो यह है कि दुनिया की सबसे अमीर सरकार को अपने ही सैनिकों की तनख्वाह देने के लिए प्राइवेट डोनेशन की जरूरत क्यों पड़ी?
trump secret news: शटडाउन की वजह क्या है?
1 अक्टूबर से अमेरिका में सरकारी शटडाउन जारी है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब बजट को लेकर कांग्रेस में सहमति नहीं बन पाती और सरकारी विभागों को फंड रिलीज नहीं होता। इस बार टकराव ObamaCare यानी हेल्थकेयर सब्सिडी को लेकर है। डेमोक्रेट्स कम आय वाले अमेरिकियों के लिए हेल्थ सब्सिडी बढ़ाना चाहते हैं, जबकि रिपब्लिकन इसे सरकारी खर्च का बोझ बताते हैं। राजनीतिक टकराव इतना गहराया कि सरकारी कामकाज तक ठप हो गया। और अब हालात ये हैं कि अमेरिकी सैनिकों की तनख्वाह भी अटकने की नौबत आ गई।
Pentagon ने क्यों स्वीकार किया दान?
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पारनेल ने कहा कि डोनेशन का इस्तेमाल सैनिकों के वेतन और जरूरी सुविधाओं के लिए किया जाएगा। हालांकि उन्होंने राजनीतिक हमला बोलते हुए डेमोक्रेट्स पर सैनिकों की तनख्वाह रोकने का आरोप लगा दिया। लेकिन आलोचक कहते हैं—जब सेना जैसे संवेदनशील सेक्टर की फंडिंग निजी दान पर निर्भर हो जाए तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।
130 मिलियन डॉलर काफी नहीं: trump secret news
यह डोनेशन बड़ी रकम है लेकिन US मिलिट्री के लिए यह एक बूंद जैसा है। अमेरिकी रक्षा बजट अरबों डॉलर में होता है। पिछले ही हफ्ते ट्रम्प प्रशासन ने 6.5 अरब डॉलर जुटाकर सैनिकों की सैलरी दी थी। अब अगली तनख्वाह कुछ दिनों में देनी है, लेकिन पैसे का इंतजाम कैसे होगा, सरकार खुद नहीं जानती। पिछले हफ्ते सरकार ने मिलिट्री रिसर्च फंड में कटौती करके सैलरी के लिए पैसा निकाला था। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरीके से डिफेंस रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर बुरा असर पड़ेगा।
क्या यह स्टोरी सिर्फ पैसे की नहीं बल्कि राजनीति की है?
सीक्रेट डोनेशन पर अब सवाल उठ रहे हैं
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क्या यह दान किसी धनी बिजनेसमैन ने दिया?
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या यह किसी देश की ओर से दिया गया ‘राजनीतिक निवेश’ है?
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क्या यह अमेरिकी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश है?
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अगर सब कुछ साफ है तो दानदाता की पहचान क्यों छिपाई गई?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खर्च में निजी दान स्वीकार करना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के खिलाफ है।
अमेरिकी जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर लोग बंट गए हैं कुछ लोगों ने इस दान को देशभक्ति बताया किसी ने सैनिकों की मदद की, इसमें गलत क्या है? तो कुछ लोग गुस्से में हैं “हम टैक्स इसलिए देते हैं ताकि अरबपति दोस्त तनख्वाह बांटें?”
नतीजा क्या निकलेगा?
अगर अमेरिका में राजनीतिक टकराव ऐसे ही चलता रहा तो यह शटडाउन और लंबा खिंच सकता है। फिलहाल सैनिकों की तनख्वाह तो मिल जाएगी, लेकिन सवाल बड़ा है—कितने दिन? क्या अमेरिका वाकई आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है या यह सिर्फ सत्ता संघर्ष का खेल है?
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