Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य मिलता है। लेकिन पूजा और व्रत के दौरान यदि कुछ सामान्य गलतियां हो जाएं तो इसका पूरा फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी 2025 पर पूजा में कौन-कौन सी गलतियों से बचना चाहिए।
योगिनी एकादशी 2025 कब है?
साल 2025 में योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन की एकादशी तिथि सुबह 7:18 बजे शुरू होकर 22 जून की सुबह 4:27 बजे तक रहेगी। तिथि के उदय के आधार पर 21 जून को ही व्रत और पूजा का पालन किया जाएगा

पूजा में न करें ये गलतियां…
झूठ बोलना और निंदा करना बंद करें..
इस पवित्र दिन पर झूठ बोलना, दूसरों की निंदा करना और बुरे विचारों से बचना चाहिए।
लड़ाई-झगड़ा और अपशब्द न बोलें…
पूजा के दिन मन और वाणी को शुद्ध रखना आवश्यक है। किसी से भी झगड़ा, क्रोध या अपशब्दों का प्रयोग न करें।
तामसिक भोजन का सेवन न करें
एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा जैसे तामसिक आहार का सेवन वर्जित है। व्रत करने वाले और व्रत न रखने वाले सभी लोगों को इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें
एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना मना है क्योंकि तुलसी माता भी इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।
बाल और नाखून न काटें
योगिनी एकादशी के दिन बाल कटवाना, नाखून काटना और दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है। इसलिए इन कार्यों से बचना चाहिए।
दिन में सोना वर्जित है…
इस दिन दिन में सोना शुभ नहीं माना जाता। व्रत रखने वाले को भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। रात में जागरण और भजन-कीर्तन करना लाभकारी होता है।
चावल का सेवन न करें
पौराणिक मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से अगले जन्म में कीड़े-मकोड़े का शरीर मिलता है। इसलिए चावल और उससे बनी किसी भी चीज़ का सेवन वर्जित माना जाता है।

नियमों का पालन करें…
व्रत और पूजा के नियमों का पालन सावधानी से करें, जैसे पारण का सही समय और विधि। नियमों की अवहेलना से व्रत का फल कम हो सकता है।
दान अवश्य करें…
दान करना योगिनी एकादशी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। दान से पुण्य मिलता है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
ब्रह्मचर्य का पालन करें…
व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखना आवश्यक है। ब्रह्मचर्य पालन व्रत की पूर्ति के लिए अनिवार्य है।
योगिनी एकादशी का महत्व..
योगिनी एकादशी व्रत से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत कुष्ठ रोग से मुक्ति दिलाने वाला और पापों का नाश करने वाला माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है ताकि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।
