योगी आदित्यनाथ ने कहा, नया भारत इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा!
आक्रांताओं का महिमामंडन देशद्रोह के समान: बहराइच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक तीखा बयान देते हुए कहा कि “भारत की विरासत पर हमला करने और इसके लोगों का अपमान करने वाले आक्रांताओं को महिमामंडित करना, देशद्रोह के समान है।” उनका यह बयान एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है और ‘नया भारत’ के विचारों को मजबूती से सामने लाया है।
आक्रांताओं को महिमामंडित करने का विरोध
योगी आदित्यनाथ ने इस बयान में कहा कि भारत की गौरवमयी संस्कृति और इतिहास को अपमानित करने वाले आक्रांताओं को सम्मान देने की कोशिश करना, देश की एकता और अखंडता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि “नया भारत” इस प्रकार के कृत्य को कभी स्वीकार नहीं करेगा और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में जिन आक्रांताओं ने देश के नागरिकों और उनकी संस्कृति को नुकसान पहुँचाया, उन्हें महिमामंडित करना भारतीय समाज के लिए एक खतरनाक दिशा होगी।
‘नया भारत’ का दृष्टिकोण
योगी आदित्यनाथ ने “नया भारत” का उल्लेख करते हुए बताया कि यह भारत अपने गौरवमयी इतिहास, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करता है। “नया भारत” को उन सभी आक्रमणकारियों और उनके अनुयायियों की विचारधारा को नकारना होगा, जिन्होंने देश को विभाजन और संघर्ष के रास्ते पर धकेला।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और संघर्षों पर गर्व करना चाहिए, और उन्हें किसी भी प्रकार की छवि सुधारने की आवश्यकता नहीं है जो केवल इतिहास को विकृत करती हो।
आक्रांताओं का महिमामंडन देशद्रोह के समान: भारत का इतिहास और राष्ट्रवाद
भारत का इतिहास बहुत ही विविध और गौरवमयी रहा है, और योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह हमारा कर्तव्य है कि हम इसे सही ढंग से प्रस्तुत करें। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे भारत के ऐतिहासिक संघर्षों और उसकी महानता के बारे में जागरूक हों, ताकि वे राष्ट्रीय एकता और सम्मान के साथ आगे बढ़ सकें।
इस बयान ने देशभर में बहस को जन्म दिया है, जहां लोग भारतीय इतिहास को सही तरीके से समझने और उसकी गरिमा को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं।
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योगी आदित्यनाथ का यह बयान न केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। यह बयान देशवासियों को यह याद दिलाता है कि हमें अपने इतिहास को सम्मान देना चाहिए और किसी भी प्रकार के बाहरी आक्रमणकारी विचारधारा से दूर रहना चाहिए।
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