Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे जातिवादी तैनाती के आरोपों की पड़ताल करने पर ये आरोप तथ्यहीन नजर आते हैं। 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से विरोधियों ने उन्हें ‘ठाकुरवादी’ करार देते हुए आरोप लगाए कि प्रशासनिक पदों पर जातिगत पक्षपात किया जा रहा है। खासकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कई बार मंचों से यह आरोप दोहराया है।

Yogi Adityanath: यही आंकड़ा लगभग 12 से 14 के बीच था
इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए यूपी के सभी 75 जिलों में नियुक्त जिलाधिकारियों (DM) की जातिगत पृष्ठभूमि की जांच की गई। आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में केवल 12 जिलों के डीएम क्षत्रिय (ठाकुर) वर्ग से हैं, जो कुल का मात्र 16% है। गौर करने वाली बात यह है कि सपा सरकार के दौरान भी यही आंकड़ा लगभग 12 से 14 के बीच था।
Yogi Adityanath: जो स्पष्ट रूप से कम थी
ब्राह्मण वर्ग से आने वाले जिलाधिकारियों की संख्या इस समय 19 है, यानी 25.5%। सपा सरकार में यह संख्या 12 से 14 के बीच थी, जो स्पष्ट रूप से कम थी।
Yogi Adityanath: आंकड़ा भी सपा शासन के समय लगभग समान था
ओबीसी (पिछड़ा वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग) से आने वाले डीएम की संख्या 21 है, यानी करीब 29%। इनमें से कई अफसरों के पास बड़े शहरों की जिम्मेदारी है। यह आंकड़ा भी सपा शासन के समय लगभग समान था।
अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) वर्ग से संबंधित 11 जिलाधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो 14.5% है। सपा शासन में यह संख्या इससे भी कम थी।
बाकी बचे 11 जिलों में डीएम सामान्य वर्ग (कायस्थ, वैश्य आदि) से आते हैं, जिनका अनुपात भी 14.5% है।
संतुलन को भी लगभग पूरा किया
Yogi Adityanath: इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योगी सरकार ने जिलाधिकारियों की तैनाती में जातिगत संतुलन बनाए रखा है और आरक्षण व सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन को भी लगभग पूरा किया है।
इस प्रकार, यह कहना गलत होगा कि योगी सरकार डीएम तैनाती में किसी एक जाति को प्राथमिकता दे रही है। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष के आरोप निराधार साबित होते हैं और यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक नियुक्तियां योग्यता और संतुलन के आधार पर की गई हैं, न कि जातिगत पूर्वाग्रहों के आधार पर।
