साल 2025 ने दस्तक दे दी है लेकिन नए साल मेंं दुनिया भर में मंदी को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं l कई सारे देशों की अर्थव्यवस्था मेंं दबाव के संकेत दिखने लगे हैं, जैसे की किसी भी देश की जीडीपी में लगातार दो तिमाही तक गिरावट दर्ज की जाती है तो यह माना जाता है की उस देश की
अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आने वाली है और ऐसे में उस देश में आर्थिक गतिविधियों में ब्रेक लगना शुरू हो जाता है l
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था दबाव में
अगर कोई एक देश आर्थिक मंदी की गिरफ्त में आ जाता है तो धीरे धीरे दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर शुरू हो जाता है और आर्थिक तौर पर एक दूसरे पर निर्भरता के कारण दूसरे देशों पर भी मंदी का खतरा मंडराने लगता है l जैसे की यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी पर मंदी का दबाव देखने को मिल रहा है, न्यूज़ीलैंड पहले से ही मंदी की चपेट में आ चुका है और हाल ही में जापान भी मंदी की समस्या से ग्रस्त है l
भारत में मंदी के असर का फिलहाल कोई संकेत नहीं
हालांकि भारत पर मंदी के असर का हाल फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहा है भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर विकास के मार्ग पर अग्रसर है और अमेंरिकी अर्थव्यवस्था में भी मंदी का खतरा कम होता दिख रहा है l लेकिन अमेंरिकी डॉलर में मजबूती और इसके कारण शेयर बाजाऱ में बिकवाली एशियाई देशों के लिये चुनौती बनी हुई है साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष, मिडिल ईस्ट क्राइसिस, और आने वाले ट्रम्प की अमेंरिका में सरकार के फैसले ग्लोबल इकॉनमी पर अपना असर दिखाएंगे l
2025 में वैश्विक मंदी की संभावना सीमित
जानकारों का मानना है की इन सभी चुनौतियों के बीच आने वाले साल 2025 में वैश्विक मंदी की संभावना सीमित है और प्रारंभिक छह महीनों में जो तय जायेगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस और जा रही है और इसी के आधार बहुत ग्लोबल इकॉनमी के पास समय है इस मंदी की चपेट से अपनी अर्थव्यस्था को बचाया जा सके l
