World Poha Day 2025: हर साल 7 जून को विश्व पोहा दिवस मनाया जाता है। पोहा आज भारत के सबसे पसंदीदा नाश्तों में से एक बन चुका है। यह हेल्दी, हल्का और हर वर्ग के लिए सुलभ ब्रेकफास्ट है। हालांकि भारत में कई फूड आइटम्स बाहर से आए हैं, लेकिन पोहा की शुरुआत यहीं भारत में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से हुई मानी जाती है। यही वजह है कि इंदौर में पोहा सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि एक पहचान बन चुका है।

World Poha Day 2025: कैसे बना पोहा इंदौर की शान
इंदौर, जिसे ‘मिनी मुंबई’ कहा जाता है, वहां की हर गली में पोहा बिकता है – चाहे छोटी दुकान हो या बड़ा रेस्टोरेंट। इंदौरवासियों की सुबह पोहे से ही होती है। माना जाता है कि महाराष्ट्र के पुरुषोत्तम जोशी अपनी बुआ के घर इंदौर आए थे, जहां उन्हें पहली बार पोहा परोसा गया। इससे प्रेरित होकर उन्होंने इंदौर के तिलक पथ पर ‘उपहार गृह’ नाम से दुकान खोली और पोहा बेचना शुरू किया। यहीं से इंदौर में पोहे की लोकप्रियता की कहानी शुरू हुई।
World Poha Day 2025: राज्यों के अनुसार पोहे के नाम
पोहा जितना स्वादिष्ट है, उतना ही विविध नामों से भी पहचाना जाता है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में इसे ‘पोहे’ कहा जाता है, वहीं बंगाल और असम में इसे ‘चिड़ा’, तेलुगु में ‘अटुकुलू’ और गुजरात में ‘पौआ’ के नाम से जाना जाता है। यह हर राज्य के स्वाद और संस्कृति के अनुसार ढल जाता है।
क्यों मनाया जाता है विश्व पोहा दिवस?
विश्व पोहा दिवस मनाने की पहल इंदौर के कलाकार राजीव नेमा ने की थी, ताकि इस स्वादिष्ट और पारंपरिक व्यंजन को वैश्विक पहचान मिल सके। आज पोहा सिर्फ इंदौर या मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हर उम्र के लोगों का पसंदीदा नाश्ता बन चुका है।
World Poha Day 2025: स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद
सादा होने के बावजूद पोहा पोषण से भरपूर होता है। यह आयरन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो पेट को हल्का और ऊर्जा से भरपूर बनाए रखता है। यही वजह है कि यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के दिल में जगह बना चुका है।
