जानिए कैसा है किन्नर महामंडलेश्वर का जीवन
गले में सोने का मोटा हार, कलाई पर रुद्राक्ष, सोने और हीरे से बना कंगन, कानों में कई तोला झुमके, नाक में समकालीन, माथे पर त्रिशूल और लाल बिंदी… यही आचार्य महामंडलेश्वर की पहचान है। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी। किन्नर अखाड़े के प्रमुख आचार्य लक्ष्मी नारायण हैं।
महाकुंभ-2025 के लिए पुराने अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़े के साथ रथ-घोड़े और संगीत के साथ पहले शहर में प्रवेश किया है और फिर शिविर में। फिलहाल अखाड़े में शामिल करीब एक हजार ‘किन्नर संत’ यहां पहुंच चुके हैं। देश-विदेश से उनका आना जारी है।

महाकुंभ में किन्नर संतों की दुनिया कैसी है?
कुंभ को लेकर उनकी क्या तैयारियां हैं? ऐसे तमाम सवालों को लेकर भास्कर की टीम किन्नर अखाड़े में पहुंची। महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने त्रिपुंडा और माथे पर लाल बिंदी लगाई थी। उनके बगल में उनका सहायक अर्जुन खड़ा था। डॉक्टर। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कहती हैं, किन्नर मेकअप से ही अच्छे लगते हैं। हम अपने रब के लिए खुद को सजाते हैं।
आमतौर पर हमारा मेकअप देखने के बाद लोग पूछते हैं कि क्या आप अपने साथ कोई मेकअप आर्टिस्ट लेकर जाती हैं। मेरा जवाब है, हमारे पास मेकअप आर्टिस्ट को हायर करने के लिए इतना पैसा नहीं है। हमने अपना मेकअप खुद करना सीख लिया है।

हर दिन दुल्हन की तरह कपड़े पहनते हैं
महामंडलेश्वर हर दिन दुल्हन की तरह कपड़े पहनते हैं। उनका कहना- 3 घंटे लगते हैं। फिर हम इस रूप में भगवान शिव की पूजा करते हैं। 4 घंटे तक हम भोलेनाथ की पूजा और प्रार्थना में तल्लीन रहते हैं। इस सब में 7 घंटे लगते हैं। कुंभ क्षेत्र में रहने के दौरान यह कार्य हर दिन जारी रहेगा। इसके बाद ही भक्तों से मुलाकात होगी।
