Fear of Marriage in Youth: कभी भारतीय संस्कृति में शादी को ‘सात जन्मों का बंधन’ माना जाता था, वहीं आज की पीढ़ी इसे ‘बंधन’ के बजाय ‘बाधा’ मान रही है। पिछले कुछ वर्षों में ये ट्रेंड बहुत तेजी से बदल रहा है। “शादी के बाद तो जिंदगी खत्म हो जाती है…”, “शादी ही बर्बादी” , “सिंगल रहो, मस्त रहो…”, “शादी क्यों करें, जब सबकुछ बिना शादी के भी मिल सकता है…”इन जैसे संवाद आजकल के युवाओं की जुबान पर आम हो चले हैं।
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रिपोर्ट्स और सर्वे भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत में युवा शादी से कतराने लगे हैं, और इसके पीछे सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और वैचारिक कई वजहें हैं।
शादी से दूर होते युवा – क्या कहता है डेटा?
सूत्रो के अनुसार, रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 की तुलना में 2020-21 में शादी की औसत उम्र बढ़ी है। पुरुषों के लिए यह उम्र अब 29 साल के करीब है और महिलाओं के लिए 25 साल।
लोकलस सर्च की 2023 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 18 से 35 वर्ष के 36% युवा “शादी न करने” के पक्ष में हैं, जबकि 24% “लेट मैरिज” के।
रिपोर्ट के अनुसार, शहरी भारत में अब हर पांचवां युवा ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ को शादी से बेहतर विकल्प मानता है।
करियर प्राथमिकता में – शादी पीछे छूट गई
आज के युवा पहले अपने करियर को सेट करना चाहते हैं। अच्छी जॉब, स्टार्टअप शुरू करना, विदेश में पढ़ाई करना जैसे सपनों की लिस्ट लंबी है। वे मानते हैं कि शादी इन सपनों के बीच एक ‘डायवर्जन’ है।
कई लड़कियों का मानना है, शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ जाती है, और फिर उन्हें अपने करियर बनाने या शुरु करने का वक्त नहीं मिलता और कुछ लड़कियों के ससुराल वाले नौकरी के लिए सपोर्ट नहीं करते हैं। तो कईयों के बच्चे और सामाजिक जिम्मेदारियां उनके करियर के आढ़े आने लगती है।

पैरेंट्स का अनुभव बना डर का कारण…
कई युवाओं ने अपने माता-पिता की असफल शादी या झगड़े देखते हैं। इससे शादी को लेकर एक नकारात्मक धारणा बन गई है। वे सोचते हैं कि अगर हमारे पैरेंट्स खुश नहीं हैं, तो हम कैसे होंगे?
मानसिक स्वास्थ्य और स्वतंत्रता की चिंता..
शादी के बाद की सामाजिक अपेक्षाएं—जैसे बच्चे पैदा करना, ससुराल के साथ सामंजस्य बनाना, आर्थिक जिम्मेदारी—युवाओं को मानसिक रूप से डराती हैं। वे आजाद रहना चाहते हैं, अपनी शर्तों पर जीना चाहते हैं।
इसके अलावा, आजकल मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ी है। युवा मानसिक शांति को सबसे ऊपर रखते हैं, और उन्हें लगता है कि शादी उस शांति में खलल डाल सकती है।
रिश्तों में अस्थिरता और भरोसे की कमी…
डेटिंग ऐप्स की भरमार और रिश्तों में तेजी से बदलाव ने भी युवाओं का शादी से भरोसा उठाया है। Tinder, Bumble जैसे प्लेटफॉर्म्स पर रिश्ते आसानी से बनते और टूटते हैं। इससे ‘परमानेंट रिलेशनशिप’ की सोच धुंधली हो गई है।
साथ ही अपने आस – पास मैटरनल ऑफेयर्स का होना भी शादी करने से रोकता हैं। ये डर लगना कि कहीं उनका पार्टनर भी ऐसा हुआ तो?

एक सर्वे के अनुसार, 50% युवा “कमिटमेंट” से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आज का रिलेशन कल नहीं रहेगा।
बढ़ती जिम्मेदारियां और खर्चे भी कारण..
महंगाई, घर के लोन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों के कारण भी युवा शादी को टालते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में शादी के बाद परिवार चलाने की औसत वार्षिक लागत ₹4.5 लाख बताई गई है, जो एक मिडिल क्लास नौकरीपेशा के लिए भारी बोझ बन सकती है।
जो प्राइवेट जॉब करते हैं, उनकी इनकम कम और मेहनत ज्यादा होती है, जिससे उन्हें लगता है कि वो खुद का खर्च पूरा नहीं कर पा रहें तो वो अपने वीवी बच्चो को कैसे संभालेंगे।
सोशल मीडिया और ग्लोबल इन्फ्लुएंस का असर..
Netflix, YouTube, Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इंडिपेंडेंट लाइफ को बढ़ावा देने वाली कहानियां युवाओं के मन को प्रभावित करती हैं। वे अब ‘सेटल होना’ नहीं, बल्कि ‘सेल्फ फुलफिलमेंट’ को ज्यादा अहमियत देते हैं। सब लोग अपने पैरो पर खड़े होना चाहते हैं।
शादी के बदलते फॉर्मेट – लिव-इन और कॉम्पैनियनशिप…
अब लिव-इन रिलेशनशिप को लोग शादी के विकल्प के रूप में अपनाने लगे हैं। उनका तर्क है कि बिना कानूनी जिम्मेदारियों के भी दो लोग साथ रह सकते हैं।

