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Reason for Lord Shiva Wearing: भगवान शिव ने क्यों धारण किया चंद्रमा? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा…

Hema Gupta July 21, 2025

Reason for Lord Shiva Wearing: भगवान शिव को देवों के देव ‘महादेव’ कहा जाता है। वे त्रिदेवों में से एक हैं और उनका स्वरूप सभी देवी-देवताओं में सबसे अनूठा और रहस्यमयी माना जाता है। भगवान शिव की उपासना करने वाले भक्त उन्हें भोलेनाथ, नीलकंठ, त्रिनेत्रधारी, और महाकाल जैसे नामों से भी जानते हैं। वे जितने गंभीर हैं, उतने ही सरल और करुणामयी भी हैं। उनके स्वरूप से जुड़ी अनेक बातें विशेष हैं, जैसे—तीसरा नेत्र, गले में सर्प की माला, जटाओं से बहती गंगा और मस्तक पर विराजमान चंद्रमा।

read more: Secret of offering Water Shivling: शिवजी को पंचामृत क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए रुद्राभिषेक की परंपरा का रहस्य…

शिव के मस्तक पर चंद्रमा क्यों?

भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं—यह एक अत्यंत रोचक और गूढ़ धार्मिक तथ्य है। चंद्रमा को शीतलता, मन की स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और ज्ञान का प्रतीक माना गया है। शिवजी के तेजस्वी, रौद्र और तपस्वी स्वरूप के बीच चंद्रमा की शीतलता एक संतुलन बनाए रखती है। शिव के सिर पर चंद्रमा का होना दर्शाता है कि क्रोध और करुणा, ऊर्जा और संतुलन—दोनों का एक साथ सामंजस्य जरूरी है।

समुद्र मंथन से जुड़ी कथा…

शिव पुराण के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो उसमें से सबसे पहले हलाहल नामक विष निकला। यह विष इतना प्रचंड था कि उससे सम्पूर्ण सृष्टि के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया। तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को स्वयं पी लिया और उसे अपने कंठ में रोक लिया। विष के प्रभाव से शिव का शरीर गर्म होने लगा।

तब सभी देवी-देवताओं ने उनसे प्रार्थना की कि वे अपने मस्तक पर शीतलता प्रदान करने वाले चंद्रमा को धारण करें ताकि विष की उष्णता को संतुलित किया जा सके। शिवजी ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। तभी से उन्हें “चंद्रशेखर” भी कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है — “जिसके सिर पर चंद्रमा है”।

चंद्रमा और प्रजापति दक्ष की कथा…

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियां थीं, सभी प्रजापति दक्ष की पुत्रियां थीं। वे सभी 27 नक्षत्रों की प्रतीक थीं। चंद्रमा को इनमें से केवल रोहिणी सबसे प्रिय थीं। वे अधिकतर समय रोहिणी के साथ ही व्यतीत करते थे। इससे अन्य पत्नियां नाराजं हो गईं और उन्होंने अपने पिता दक्ष से इसकी शिकायत कर दी।

क्रोधित होकर दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि वे धीरे-धीरे क्षय रोग से ग्रस्त हो जाएंगे और उनकी सभी कलाएं क्षीण हो जाएंगी। चंद्रमा को जब यह श्राप लगा, तो उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई। तब देवर्षि नारद ने उन्हें भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी।

चंद्रमा ने कठिन तपस्या की और अंततः भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने चंद्रमा को मृत्यु से मुक्ति दिलाई और उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया कि चंद्रमा हर महीने क्षीण और पूर्ण होंगे—जिसे आज हम चंद्र के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के रूप में जानते हैं। पूर्णिमा पर चंद्रमा का पूर्ण स्वरूप इसी वरदान का फल है।

शीतलता और ज्ञान का प्रतीक चंद्रमा…

चंद्रमा न केवल शीतलता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि उन्हें मन, विद्या और सौंदर्य का भी प्रतीक माना गया है। हिंदू ज्योतिष में चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है। भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा होने का अर्थ यह भी है कि शिवजी अपने कठोर तपस्वी रूप के बावजूद मन की शांति और नियंत्रण को महत्व देते हैं।

27 नक्षत्र कन्याएं – चंद्रमा की पत्नियां..

चंद्रमा की 27 पत्नियां थीं जो सभी नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं:-

रोहिणी, रेवती, कृतिका, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, सुन्निता, पुष्य, अश्लेषा, मघा, स्वाति, चित्रा, फाल्गुनी, हस्त, राधा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूला, अषाढ़, अभिजीत, श्रावण, सर्विष्ठा, शतभिषा, प्रोष्ठपदा, अश्वयुज, और भरणी।

इन सभी में से रोहिणी सबसे प्रिय थीं, जो चंद्रमा के पक्षपात की मुख्य वजह बनीं और श्राप का कारण बनीं।

About the Author

Hema Gupta

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"मैं हेमा गुप्ता, पिछले 2 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं। एक क्रिएटिव और पैशनेट कंटेंट राइटर होने के साथ-साथ मैं ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव रखती हूं। मेरा फोकस स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट, सनातन संस्कृति और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों पर रहता है। सटीकता, सरल भाषा और रोचकता मेरी लेखन शैली की खासियत है। चाहे डिजिटल प्लेटफॉर्म हो या ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, मेरा मकसद हमेशा ऑडियंस को सही और दिलचस्प जानकारी पहुंचाना है.

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