सत्यम शिवम सुंदरम….
Why Lord Shiva is Worshipped in Sawan: भगवान शिव स्वयंप्रकाशी हैं वे अपने प्रकाश से सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करते हैं। शिव अगोचर, अनादी, अविनाशी हैं। सभी देवताओं में सर्वश्रेष्ठ इसलिए वे देवों के देव महादेव कहलाते हैं। शिव को अशुतोष भी कहते हैं जिसका अर्थ है त्वरित प्रसन्न होने वाला। जिसे कोइ स्वीकार नहीं करता उसे भी त्रिकालदर्शी अपनाते है। इसलिए कानों में कुण्डल के स्थान पर बिच्छू, गले में भुजंग, कंठ में कालकूट विष सामाए हुए हैं। शिव मृत्यु के देवता भी हैं और सृष्टि के संहारकर्ता भी हैं।

माता पार्वती ने शिव भगवान के लिए रखा था व्रत
सावन मास में ही पार्वती माता ने शिव के लिए व्रत रखा था जिससे वे भगवन शिव को पती के रूप में पासकें। सावन में ही शिव पृथ्वी पर अपने सासुराल गए थे वहां जलाभिषेक करके स्वागत किया था। दूसरी वजह, भगवान शिव ने सनत्कुमार को बताया कि इसका महत्व सनने के योग्य है। जिससे सिद्धि मिलती है, इसलिए इसे श्रावण कहते हैं। इसमें निर्मलता का गुण होने से ये आकाश के समान है, इसलिए इसे नभा भी कहा गया है।
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महाभारत काल से जाने सावन का महत्व
सावन का महत्व बताते हुए महाभारत के अनुशासन पर्व में अंगिरा ऋषि ने कहा है कि जो इंसान मन और इन्द्रियों को काबू में रखकर एक वक्त खाना खाते हुए श्रावण मास बिताता है, उसे कई तीर्थों में स्नान करने जितना पुण्य मिलता है।
Why Lord Shiva is Worshipped in Sawan: अमृत पान सभी करना चहते थे लेकिन जनकल्याण के लिये विष केवल भगवान शिव ने पीया, यही कारण है देवता और दैत्य दोंनों इनकी आराधना करते हैं ।
