सनातन परंपरा में दाहिने हाथ का महत्व
Why Left Hand Is Avoided in Hindu Worship: भारतीय सनातन संस्कृति में दाहिने हाथ को शुभ और पवित्र कर्मों के लिए उपयुक्त माना गया है। पूजा-पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में दाहिना हाथ ‘कर्म हाथ’ कहलाता है…. जिससे हम सत्कर्म और पुण्य कार्य करते हैं। इसलिए देवताओं को अर्पण की जाने वाली हर सामग्री जैसे जल, फूल, दीपक आदि दाहिने हाथ से ही दी जाती है।
बाएं हाथ की सीमाएं और उपयोग
बाएं हाथ को सामान्यत शारीरिक और दैनिक क्रियाकलापों जैसे साफ-सफाई, वस्त्र पहनना, भोजन परोसना आदि से जोड़ा जाता है… इसलिए इसे पूजा जैसे पवित्र कार्यों में उपयोग करना अनुचित माना गया है। शुद्धता और पवित्रता के सिद्धांतों के अनुसार दाहिने हाथ का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना गया है।
शास्त्रीय आधार और धार्मिक निर्देश
हिंदू धर्म के शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पूजन सामग्री जैसे तुलसी पत्र, नैवेद्य, दीपक या प्रसाद सभी को दाहिने हाथ से ही देना चाहिए। यह श्रद्धा और मर्यादा का प्रतीक होता है और व्यक्ति की आंतरिक भावना को देवता स्वीकार करते हैं।
मानसिक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्व
दाहिने हाथ से पूजन सामग्री अर्पित करना व्यक्ति के मानसिक अनुशासन और सामाजिक व्यवहार को दर्शाता है। यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक सोच है जो व्यक्ति को संयम, शुद्धता और मर्यादा का पाठ सिखाती है।
जब दाहिना हाथ संभव न हो
Why Left Hand Is Avoided in Hindu Worship: यदि कोई व्यक्ति जन्मजात रूप से बाएं हाथ का प्रयोग करता है या फिर किसी शारीरिक समस्या के कारण दाहिना हाथ प्रयोग करने में असमर्थ है, तो ऐसे में भावना को प्रधानता दी जाती है। शास्त्रों में स्पष्ट है कि भगवान भावना के भूखे होते हैं न कि केवल प्रक्रिया के। लेकिन सामान्य स्थिति में परंपरा का पालन करना अनुशासन और श्रद्धा दोनों को दर्शाता है।
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