तिलक: सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा का विज्ञान
Which Finger to Apply Tilak: भारतीय संस्कृति में तिलक लगाना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सूक्ष्म ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम भी है। यह माथे पर स्थित ‘आज्ञा चक्र’ को सक्रिय करता है, जिससे मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और एकाग्रता बढ़ती है।
अंगूठा: ईश्वर के प्रति श्रद्धा का प्रतीक
अंगूठे से तिलक लगाना ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इससे आत्मा की शुद्धि होती है और आंतरिक श्रद्धा जागृत होती है। इसे देवताओं के लिए सबसे उपयुक्त उंगली माना गया है।
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तर्जनी: जिससे तिलक लगाना माना गया है वर्जित
तर्जनी उंगली को उपदेश और आदेश देने वाली उंगली कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे तिलक लगाना अशुभ होता है, क्योंकि यह उंगली दंड और आलोचना का प्रतीक मानी जाती है।
मध्यमा और अनामिका: शनि और सूर्य से जुड़ी उंगलियां
मध्यमा उंगली से तिलक करने पर वैराग्य, गंभीरता और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है। विशेषकर शनिवार को शनि से संबंधित तिलक जैसे काली हल्दी से इसे लगाना शुभ होता है। वहीं अनामिका उंगली अग्नि और सूर्य तत्व से जुड़ी है, जिससे तिलक करने पर तेज, ज्ञान और ओज की प्राप्ति होती है।
कनिष्ठा: ब्रह्मा से जुड़ी सृजनात्मकता की उंगली
कनिष्ठा उंगली ब्रह्मा का प्रतीक मानी जाती है। इससे तिलक करने से रचनात्मकता, कला और विद्या का विकास होता है। यह खासतौर से विद्यार्थियों, कलाकारों और संगीत साधकों के लिए लाभकारी मानी जाती है।
Which Finger to Apply Tilak: तिलक हमेशा दाहिने हाथ से ही लगाएं क्योंकि यह शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना जाता है। तिलक केवल माथे की शोभा नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्रता का भी संकेत है।
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