डिजिटल रेप इंटरनेट के माध्यम से नहीं होता
क्या है आप डिजिटल रेप के बारे में जानते हैं, डिजिटल रेप का मतलब यह नहीं कि किसी लड़की या लड़के का शोषण इंटरनेट के माध्यम से किया जाए। यह शब्द डिजिट और रेप से बना है। अंग्रेजी के डिजिट का मतलब जहां अंक होता है, वहीं अंग्रेजी शब्दकोश के मुताबिक उंगली, अंगूठा, पैर की उंगली, इन शरीर के अंगों को भी डिजिट कहा जाता है।
कैसे होता है डिजिटल रेप
जो यौन उत्पीड़न जो डिजिट यानि उंगली, अंगूठा, पैर की उंगली से किया गया हो, तब उसे ‘डिजिटल रेप’ कहा जाता है। दरअसल, डिजिटल रेप से जुड़ी घटनाओं में प्राइवेट पार्ट में फिंगर्स, अंगूठे या हाथ का इस्तेमाल किया जाता है।
रेप से कितना अलग है डिजिटल रेप?
वैसे कानून की नजर में रेप तो रेप है उसमें कोई फर्क नहीं होता.रेप और डिजिटल रेप में जो सबसे बेसिक फर्क है सिर्फ रिप्रोडक्टिव आर्गन के इस्तेमाल का. 2012 से पहले डिजिटल रेप छेड़छाड़ का केस बनता था. लेकिन निर्भया केस के बाद इसे रेप की कैटेगरी में डाल दिया।
डिजिटल रेप में किचनी सजा मिलती है
डिजिटल रेप के मामले में आरोपी को कम से कम पांच साल तक जेल की सजा और कुछ मामलों में, यदि वो संगीन हैं तो यह सजा 10 साल तक की हो सकती है। अगर डिजिटल रेप के साथ अन्य धाराएं भी लगीं हैं तो आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है। डिजिटल रेप केस में धारा 354 और 376 के साथ यदि पीड़िता नाबालिग है तो पॉक्सो एक्ट की भी धाराएं लगाई जाती हैं।
निर्भया कांड के बाद मिला कानूनी दर्जा
दिसंबर 2012 में दिल्ली में निर्भया कांड के बाद यौन हिंसा से जुड़े कानूनों की फिर से समीक्षा की गई और साल 2013 में डिजिटल रेप को मान्यता मिली। जिसके बाद डिजिटल रेप को Pocso एक्ट के अंदर शामिल किया गया अब ओरल सेक्स भी बलात्कार की श्रेणी में आता है।
what is digital rape
