What is Alzheimer’s: अल्जाइमर एक ऐसा रोग है, जो व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार को धीरे- धीरे प्रभावित करता है। यह डिमेंशिया का सबसे आम रुप है। आमतौर पर यह रोग 60 से अधिक आयु वाले लोगों में ज्यादा देखा जाता है। लेकिन आजकल इसके शुरुआती लक्षण कम उम्र में भी सामने आने लगे हैं। भारत सहित पूरी दुनिया में अल्जाइमर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है।
अल्जाइमर क्या है?
यह एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल रोग है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं धीरे- धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और अंतत: मरने लगती हैं। इसका असर व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। यह बीमारी समय के साथ बढ़ती जाती है और मरीज को खुद के जीवन से जुड़ी बातें तक याद नहीं रहतीं हैं।
अल्जाइमर के प्रमुख लक्षण…
अल्जाइमर के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर हो सकते हैं। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं-
1. स्मृति की कमजोरी: हाल की घटनाएं याद नहीं रहना, बार-बार एक ही बात पूछना।
2. सोचने और समझने में दिक्कत: निर्णय लेने या कोई योजना बनाने में कठिनाई होना।
3. भाषा संबंधी समस्या: शब्दों को भूल जाना, बात करते समय अटक जाना।
4. रोजमर्रा के कामों में परेशानी: कपड़े पहनना, खाना बनाना, पैसे का हिसाब रखना कठिन लगना।
5. समय और स्थान की पहचान खोना: व्यक्ति को यह याद नहीं रहता कि वह कहां है या किस समय की बात हो रही है।
6. व्यवहार में बदलाव: चिड़चिड़ापन, उदासी, गुस्सा या डर जैसी भावनाओं में बदलाव आना।
7. सोशल गतिविधियों से दूरी: दोस्तों-परिवार से कटना या सामाजिक कार्यक्रमों में रुचि कम हो जाना।

कारण…
अल्जाइमर का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कई जैविक, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों के मिश्रण से होता है। संभावित कारणों में शामिल हैं-
1. मस्तिष्क में प्लाक्स और टैंगल्स (बेटा-एमिलॉइड प्रोटीन और टाऊ प्रोटीन का असामान्य जमाव)।
2. उम्र बढ़ना।
3. परिवार में अल्जाइमर का इतिहास।
4. सिर पर गंभीर चोट लगना।
5. हार्ट डिजीज, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि।
6. अत्यधिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं
इसका निदान कैसे होता है?
अल्जाइमर का कोई एकमात्र टेस्ट नहीं होता, लेकिन निम्नलिखित तरीकों से इसकी पुष्टि की जा सकती है:
1. मेडिकल हिस्ट्री और मानसिक परीक्षण।
2. न्यूरोलॉजिकल एग्जामिनेशन (स्मृति, ध्यान, भाषा आदि की जांच)।
3. ब्रेन स्कैन (MRI या CT स्कैन से मस्तिष्क की स्थिति का आकलन)।
4. ब्लड टेस्ट और जेनेटिक टेस्ट (कुछ मामलों में)।

अल्जाइमर का उपचार…
अभी तक अल्जाइमर का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन कुछ उपायों और दवाओं के माध्यम से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है और रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
दवाइयां..
1. डोनेपेजिल (Donepezil)।
2. रिवास्टिगमाइन (Rivastigmine)।
3. मेमांटिन (Memantine)।
ये दवाएं मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
व्यवहारिक उपचार…
1. संगीत, कला, योग और ध्यान जैसी गतिविधियों से मरीज को राहत मिल सकती है।
2. परिवार और देखभाल करने वालों की भूमिका बेहद अहम होती है।
बचाव के उपाय…
हालांकि अल्जाइमर को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियों को अपनाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है:
1. मानसिक व्यायाम: नियमित रूप से पढ़ना, पजल हल करना, नई चीजें सीखना मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।
2. स्वस्थ आहार: हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर डाइट लेना।
3. नियमित व्यायाम: शारीरिक रूप से सक्रिय रहना मस्तिष्क और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद है।
4. नींद पूरी लें: 7-8 घंटे की नींद मस्तिष्क को रिपेयर करने में मदद करती है।
5. तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन, योग और हंसी जैसे उपायों से तनाव कम किया जा सकता है।
6. सोशल एक्टिव रहना: लोगों से मिलते रहना और बातचीत में शामिल होना मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।
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