wakf law supreme court muslim hindu trusts : सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या मुस्लिम बनेंगे हिंदू ट्रस्टों का हिस्सा?
wakf law supreme court muslim hindu trusts : भारत के सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को वक्फ संशोधन कानून 2025 को लेकर दो घंटे की अहम सुनवाई हुई। इस कानून के खिलाफ अब तक 100 से ज्यादा याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जिससे साफ है कि यह मुद्दा केवल एक धार्मिक या कानूनी प्रश्न नहीं, बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन चुका है।
⚖️ क्या है वक्फ संशोधन कानून और क्यों हो रहा है विवाद?
वक्फ कानून एक इस्लामिक कानून पर आधारित व्यवस्था है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और परोपकारी संपत्तियों का संरक्षण और प्रबंधन किया जाता है। 2025 में सरकार द्वारा इसमें संशोधन कर गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई।
यह संशोधन पहली बार हिंदुओं और अन्य गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड का हिस्सा बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
📌 मुख्य आपत्तियाँ क्या हैं?
याचिकाकर्ताओं और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी, और सीयू सिंह ने कोर्ट में यह दलील दी कि:
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वक्फ कानून के तहत गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त करना धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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यह मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता और स्व-प्रशासन के अधिकार पर सीधा हमला है।
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वक्फ बोर्ड की संरचना में बाहरी हस्तक्षेप से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।
🧑⚖️ सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया: केंद्र से तीखा सवाल
कोर्ट ने कानून पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन सुनवाई के दौरान केंद्र से एक ज्वलंत और तीखा सवाल पूछा:
“क्या केंद्र सरकार मुस्लिमों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में शामिल करने को तैयार है?”
इस सवाल ने न केवल सरकार को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका इस मुद्दे को केवल कानूनी नहीं, सांस्कृतिक और संवैधानिक परिप्रेक्ष्य में भी देख रही है।
💬 सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें
केंद्र सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया:
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वक्फ कानून में संशोधन का उद्देश्य पारदर्शिता और समानता लाना है।
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उन्होंने हिंसा पर चिंता जताई और कहा, “हमें यह नहीं लगाना चाहिए कि हिंसा के जरिये कोर्ट पर दबाव बनाया जा सकता है।”
🔥 हिंसा और विरोध: कानून के खिलाफ सड़क से कोर्ट तक संघर्ष
वक्फ कानून के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी चिंता जताई और कहा कि:
“हिंसा के ज़रिए किसी भी प्रकार से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता।”
यह साफ संकेत है कि कोर्ट किसी दबाव में नहीं आने वाला है, लेकिन वह इस मुद्दे की संवेदनशीलता और सार्वजनिक प्रतिक्रिया को नजरअंदाज भी नहीं करेगा।
🕵️♂️ क्या है हिंदू ट्रस्टों में बाहरी हस्तक्षेप का नियम?
भारत में हिंदू धार्मिक ट्रस्टों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से धार्मिक आस्था और परंपरा पर आधारित होती है। कानून के मुताबिक, इनमें किसी बाहरी समुदाय के व्यक्ति को शामिल करना संभव नहीं होता।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का सवाल – “क्या मुसलमानों को भी उसी तरह शामिल किया जाएगा जैसे हिंदुओं को वक्फ में?” – सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
📅 अगली सुनवाई: क्या बदलेगा दिशा?
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर 2 बजे करेगा। कोर्ट की बेंच जिसमें CJI संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार, और जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल हैं, इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की दलीलें गहराई से सुनना चाहती है।
📌 धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सरकारी हस्तक्षेप
वक्फ संशोधन कानून ने भारतीय संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और सांप्रदायिक सौहार्द के बीच संतुलन की बहस को फिर से ज़िंदा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब सवाल है
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क्या धार्मिक संस्थानों में बाहरी समुदाय की भागीदारी संभव है?
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क्या वक्फ कानून का यह संशोधन भारतीय संविधान के अनुरूप है?
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और क्या यह सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करेगा या सुधार लाएगा?
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