‘वोट चोरी’ विवाद: राहुल बनाम चुनाव आयोग का घमासान

भारतीय लोकतंत्र की सबसे पवित्र प्रक्रिया है मतदान, और उसका मूल सिद्धांत है एक व्यक्ति, एक वोट। लेकिन जब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते हैं, तो ये सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि करोड़ों वोटर्स की निष्ठा पर सवाल बन जाता है। अब इस मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया है चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के बयानों को गंदे शब्दों की संज्ञा देते हुए सख्त नाराजगी जताई है।
राहुल गांधी का आरोप: सिस्टमेटिक वोट चोरी हो रही है
12 अगस्त को राहुल गांधी ने संसद में 124 साल की पहली बार वोट डालने वाली महिला मिंता देवी की फोटो वाली टी शर्ट पहनकर कदम रखा और कहा:
बहुत सी सीटों पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जा रही है। ये नेशनल लेवल पर एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है।
राहुल का दावा था कि अब उनके पास सबूत हैं, और उन्होंने यह भी कहा कि:
हम संविधान की रक्षा कर रहे हैं। ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ हमारी नींव है, और चुनाव आयोग इसे लागू करने में नाकाम रहा है।
उन्होंने कर्नाटक की महादेवपुरा सीट का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां एक लाख से ज्यादा वोट चोरी हुए और एक महिला ने दो बार मतदान किया।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया: ऐसे गंदे शब्द लोकतंत्र पर हमला हैं
चुनाव आयोग ने 14 अगस्त को बेहद सख्त बयान जारी करते हुए कहा:
वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर झूठी कहानी गढ़ना देश के करोड़ों वोटर्स और लाखों चुनावकर्मियों पर सीधा हमला है। ये न सिर्फ अपमानजनक है बल्कि अव्यावहारिक और आधारहीन भी।
आयोग ने यह भी जोड़ा कि अगर राहुल गांधी के पास सबूत हैं तो उन्हें एक शपथ पत्र के साथ पेश करना चाहिए।
बिना प्रमाण सभी मतदाताओं को ‘चोर’ कहना गहरी गैर जिम्मेदारी है। अगर उनके आरोप सही हैं, तो उन्हें हलफनामे पर दस्तखत करने में हिचक क्यों?
क्या है ‘मिंता देवी’ विवाद?
बिहार की अपडेट हुई वोटर लिस्ट में एक महिला मिंता देवी की उम्र 124 साल बताई गई, और दावा किया गया कि वह फर्स्ट टाइम वोटर हैं। राहुल ने इस केस को सिस्टमेटिक गड़बड़ी की मिसाल बताया। लेकिन चुनाव आयोग का कहना है कि ये डेटा एरर है, जिसे सुधारा जा सकता है, लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर की साजिश कहकर पेश करना भ्रामक और गैर जिम्मेदाराना है।
EC ने क्या मांग की राहुल से?
- 8 अगस्त: EC ने कहा अगर राहुल को अपने आरोपों पर भरोसा है, तो वह हलफनामा साइन करें।
- 10 अगस्त: कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा आपके प्रेजेंटेशन में दिखाए गए स्क्रीनशॉट और दस्तावेज हमारे रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
- 14 अगस्त: EC ने सार्वजनिक बयान में कहा वोट चोरी जैसे शब्दों से बचें।
राहुल का जवाब?
मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है, और वही मेरे लिए सर्वोच्च है। EC मेरी नीयत पर सवाल नहीं उठा सकता।
क्या कहना है जनता और विशेषज्ञ वर्ग?
कई वोटर्स इस बयानबाजी से उलझन में हैं किसे सही मानें? विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हो सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आयोग को खुली जांच और डेटा ट्रांसपेरेंसी से जनता का विश्वास और मज़बूत करना चाहिए।
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