Vishnu Varah Temple Of Majhauli: मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर को संस्कारधानी कहा जाता है, यहां कई प्राचीन और अद्भुर मंदिर हैं, जिनमें से एक मझौली में स्थित विष्णु वराह मंदिर हैं, जो कि अपनी अद्भुत कथाओं और आस्था की वजह से प्रसिद्ध है।
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क्या है मंदिर का इतिहास?
स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह मंदिर कल्चुरी काल से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर के निर्माण में उस समय के काले पत्थरों का प्रयोग किया गया था, जिन पर बारीक नक्काशी देखने को मिलती हैं। अब यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है मंदिर के देखरेख अब पुरातत्व विभाग करता है।

कैसे हुई मंदिर की स्थापना?
स्थानीय मान्यता के अनुसार, 11वीं सदी के आसपास के समय की बात है, जब एक व्यक्ति तालाब में मछली पकड़ने गया। उसने जब जाल तालाब में डाला तो उस जाल में मछली की जगह भगवान की विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा फस गई। उसे व्यक्ति को लगा की वो मछली है लेकिन जब जाल को बाहर निकाला तो देखा उसमें भगवान विष्णु के वराह अवतार की छोटी प्रतिमा मिली।
तब युवक उस प्रतिमा को अपने घर ले गया और उसके पूजा करने लगा। एक बार उसे भगवान का सपना आया तब वराह अवतार को मंदिर में स्थापित किया गया।
वहां के लोग यह भी बताते हैं कि जब यह प्रतिमा मिली थी तब बेहद छोटी थी लेकिन धीरे- धीरे उस आकार बढ़ता गया और आज प्रतिमा विशाल रुप में विराजमान है।

देवी – देवताओं की उपस्थिति…
मझोली मंदिर में केवल भगवान विष्णु के वराह अवतार की ही नहीं बल्कि भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान, साथ ही कृष्ण और राधा रानी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
भक्तों की मानना है कि इस मंदिर में दर्शन मात्र से सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। भगवान यहां के हर संकट को पहले ही दूर कर देते हैं। भक्तों को सुखमय जीवन का आर्शीवाद देते हैं।

इस तरह से पहुंच सकते हैं मंदिर ?
यह मंदिर जबलपुर शहर से लगभग 45 KM दूर मझौली कस्बे में स्थित है। सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है और आसपास के गांवों व जबलपुर शहर से भक्त बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं।
